Hindi Love Story – दिल को कुरेदने वाली एक प्रेम कहानी

हृदय को कोई भाषा नहीं भाती इसकी कहानी चाहे Hindi Love Story के रूप में लिखी जाए अन्यथा अंग्रेजी शब्दों के जोड़ से बुन दिया जाए। सच्चे प्रेमी प्रेमिकाओं की जोड़ी का जब संगम होता है तो वे न एक दूसरे के भीतर रंग देखते हैं और न ही जात धर्म।

Hindi Love Story

दोनों युवक युवती एक दूसरे के समक्ष खुद को समर्पित कर देते हैं और ईश्वर के उपहार स्वरूप दिए गए जन्म के मूल सिद्धांत की खोज करने निकल पड़ते हैं। प्रेम ही इस दुनिया का मूल सिद्धांत है जिस पर यह दुनिया मजबूती से टिकी हुई है। ऐसी ही एक Hindi Love Story आपके नजरों को न्योछावर करने जा रहे हैं। स्वागत है आपका Hindi Love Story के किस्सों में। 

Hindi Love Story: न जाने कोई भाषा

मेरा नाम रोहन श्रीवास्तव है। मेरे जीवन में प्रेम के मायने शायद किसी पर्दे पर प्रदर्शित फिल्मों से काफी अधिक है। जीवन के हर पढाव पर व्यक्ति किसी शख्स से जरूर प्रेम करता है, परन्तु जब वह अपना प्रेम स्वंय चुनता है तो वह एहसास बिल्कुल भिन्न ही होता है।

मेरे जीवन में यह एहसास आया परन्तु इसमें मैंने खुद नहीं चुना बल्कि कुदरत ने एक इशारा किया। जिसकी शुरुआत तब हुई जब मेरी उम्र मात्र 10 साल की थी। इस Hindi Love Story की शुरुआत करने से पहले मैं आप सबको वक्त के उस दौर में ले जाना चाहता हूँ, हालांकि यह सत्य है कि कोई भी मानव अपने बीते हुए काल में नहीं जाना चाहता चाहे वह समय उसका सबसे बहतरीन हो या सबसे खराब। लेकिन मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत हादसा मेरे उसी उम्र में हुआ।

साल 2005, महीना जून

मेरे पापा का हाल ही में इस शहर में ट्रांसफर हुआ। यह शहर देश में ‘सिटी ब्यूटीफुल’ नाम से भी पहचान बनाता है। चंडीगढ़ में मौजूद अनगिनत स्कूलों में पापा को पसंद DAV स्कूल आया। मैं बचपन से अपने गांव के स्कूल में उतीर्ण रहता था कारण था कि वह स्कूल हिंदी मीडियम था।

लेकिन जैसे ही इस स्कूल में एडमिशन लिया मेरे भाव बदलने लगे थे। पापा तो नक्की करके बैठे थे कि अंग्रेजी मीडियम में मुझे पढ़ाकर मेरा भविष्य में रोशनी ला देंगे। परन्तु अब मुझे हिंदी से प्रेम हो गया था। वो कहते हैं न कि हर एक को प्रेम से पहले एक दूसरे की आदत होती है। 

मेरे स्कूल का पहला दिवस बेहद डर से शुरू हुआ लेकिन अंत कुछ यूं था। पहले दिन स्कूल में पापा लेकर गए थे। स्कूल में देर से घुसा था। सबसे पहले तो प्रिंसीपल के रूम में लेकर जाया गया जहाँ उनसे मुलाकात के बाद स्कूल के peon ने क्लास के पते तक पहुंचाया। सभी बच्चे अभी बाहर ग्राउंड में प्रेयर कर रहे थे। मैं दूसरी तरफ क्लास में इंतजार कर रहा था। 

जैसे ही सभी स्टूडेंट्स क्लास में पहुंचते हैं, मैं अपने बेंच में खड़ा हो जाता हूँ। सभी को इज्जत देने के लिए। वह भीड़ अपने बेंच पर इस तरह दौड़ते हैं मानो कोई रेस लगी है जो सबसे पहले पहुंचेगा उसे एक इनाम मिलने की घोषणा हुई हो। परन्तु इसके पीछे का कारण अंग्रेजी के अध्यापक योगेश्वर सर थे। उनकी कदमो की ध्वनि तरंगों ने कान के पर्दों को फाड़ दिया था।

जैसे ही वह आए , वे अकेले नहीं बल्कि एक खूबसूरत सी छोटे कद, लंबे बाल और प्यारी आंखे जो उस समय नीचे झुकी हुई थी, शर्म के मारे मुख क्लास के तरफ नहीं मुड़ पा रही थी। योगेश्वर सर ने पूरी क्लास को उस लड़की से इंट्रोड्यूस कराया। लड़की का नाम ‘मिनाली’ था।

सर से आदेश मिलने के बाद मिलानी ने अपनी प्यारी आंखों से पूरी क्लास में देखा ताकि बैठने के लिए जगह मिल जाए। मिलानी को जगह मिली भी वह जगह क्लास के सबसे आखिरी बैंच पर थी जिसपर एक लड़की अकेली बैठी थी। तभी सर ने मिनाली को रोका और मेरे साथ बैठे लड़के को उठाकर पीछे भेज दिया।

मिनाली को मेरे साथ बैठने को कह दिया। मेरी नजर शर्म के मारे नीचे झुक गई। उसने भी मुझे एक सेकंड के लिए देखा और बैठ गई। दोनों की नजरों ने एक दूसरे से एक ही बार मे बहुत कुछ कह दिया था। लेकिन यह प्यार नहीं था।

बचपन में प्यार का अर्थ क्या होता है क्या मालूम। क्लास में पहले बेंच और स्कूल में नए बच्चे होने के कारण सर ने हमसे इंग्लिश का चैप्टर पढ़ाया। यह बचपन में एक तरह का रैगिंग ही होती थी। अगर अच्छे से न पढ़ पाए तो सभी मौजूद जीवों की मुस्कराहट दिल पर आहत करती। मैं अब घबराया हुआ था।

इंग्लिश अब तक मात्र रटा मारकर कर दिया जाता था लेकिन अब समझनी होगी। जैसे ही मिनाली ने इंग्लिश चैप्टर को पूरी क्लास के सामने पढ़ा सभी देखते ही रह गए। उसकी आवाज काफी मनमोहक थी और इंग्लिश बोलने का ढंग भी लाजवाब था।

उसके बोलने के ढंग को देखकर मैं शर्म से लाल हो गया था मुझे लगा कि वह मेरे पर हसी गी। क्योंकि सर ने उसी वक्त मुझे एक कार्य सौंपा था उन्होंने मुझे इंग्लिश के वाक्यों का हिंदी मतलब बताने को कहा था ताकि मैं इंग्लिश को सही समझ सकूँ। दूसरी ओर मिनाली की हिंदी कमजोर थी।

वैसे तो दोनों भाषा में लोगों ने मतभेद किया हुआ है। जहाँ जिस भाषा की मात्रा ज्यादा होती है वहा दूसरी भाषा अपना अस्तित्व ढूंढती है। लेकिन मेरे इस केस में हिंदी एयर अंग्रेजी ने हम दोनों का मिलन कर दिया। मिनाली मेरी इंग्लिश की बिना सैलरी वाली टीचर बन गई और मैं उसका हिंदी का अध्यापक।

प्यार की कोई भाषा नहीं होती उसे जिस रूप में कहो अर्थात किसी भी भाषा में कहो मस्तिष्क में प्रेम के भाव जगा ही देती है। अब मुझे मिनाली की आदत होने लगी थी। उससे सीखते सीखते कब मैं प्रेम करना सीख गया मालूम ही न हुआ।

प्रेम की गाड़ी तेजी से अपने आगे के पढाव पार करने लगी अब यह साल 2006 फिर 2007 और फिर ऐसे करते करते हमारी उम्र में भी बढ़ोतरी हो गई और अब हम बारहवीं कक्षा में पहुंच चुके थे। इन सालों में हमारी मित्रता अलग पैमाने लिख चुकी थी।

लेकिन मैं मिनाली से अभी भी खुलकर प्रेम का इजहार नहीं कर पाया। हम दोनों अब एक दूसरे की टीचर तो नहीं थे क्योंकि दोनों ने भाषा की डिग्री हासिल कर ली थी। आखिरी फाइनल पेपर देकर जैसे ही मिनाली कक्षा से निकली अपने दोस्त के जिद करने पर मैंने हिम्मत कर मिनाली को ग्राउंड में बुलवाया।

वहां उसे मैंने अपना प्यार का इजहार किया लेकिन मैं डरा हुआ था कहीं वो मना न करदें। मिनाली मेरी बातें सुनकर कुछ नहीं बोली सिर्फ इतना पूछा की तुम्हें मैं कागज पर कुछ इंग्लिश के वर्ड्स लिखकर उसका मीनिंग पूछती थी पर तुमने कभी वो काम पूरा नहीं किया। इसीलिए मैं तुमसे नाराज हूँ। मैं कल ही जा रही हूँ अपने घर केरल। 

मैं उसकी यह बात सुनकर बेहद दुखी था और अपने आपको कोस रहा था, आखिर क्यों नही मैंने मिनाली को पहले ही अपने प्यार का इजहार नहीं किया, क्यो इतना समय लिया। अगर पहले कहा होता तो आज यह न होता। 

मैं दुखी तो था पर एक बात से परेशान भी। पिछले काफी समय से मिनाली मुझे बार बार कागज पर उसके द्वारा लिखे इंग्लिश वाक्यों के अनुवाद को कहती। हम दोनों एक दूसरे को अपनी अपनी भाषा के सही अर्थ लिखकर अनुवाद लिखवाते थे। 

मैंने तुरंत जाकर अपने बैग से वह कागज निकाला। जिसका अनुवाद कुछ यूं था

” हैलो रोहन, मैं जानती हूँ तुम मुझसे प्यार करते हो लेकिन कह नहीं पाते। हालांकि मैं भी तुमसे अपने प्यार का इजहार कर सकती हूँ लेकिन मुझे तुम्हारे मूहँ से ही सुनना पसंद है। जब तुम तिरछी नजरों से मुझे प्यार से देखते हो तो मैं खुद को दुनिया की सबसे खूबसूरत और खुशकिस्मत मानती हूँ। ज्यादा मेरे पास शब्द नहीं है। धन्यवाद मेरा हर वक्त साथ देने के लिए। आई लव यू।”

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ये थी Hindi Love Story से एक प्रेम कहानी. उम्मीद है आपको पसंद आया होगा. ऐसी ही कहानियाँ पढ़ने के लिए हमारे साथ बने रहें.

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Priyo Nayak

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