Hindi Moral Stories – हर जीव का एक अलग ही महत्व होती है!

कहानियों का जन्म ठीक उसी वक्त हुआ था, जिस वक्त इस धरती की रचना हुई थी। इन प्रत्येक कहानियों में Hindi Moral Stories का स्थान बेहद प्रथम एवं इज्जत से लिया जाता है। इसी संदर्भ में इस पोस्ट में हजारों Hindi Moral Stories में से एक ऐसी कहानी का भेंट स्वरूप हमारे पाठकों को दिया जाएगा।

Hindi Moral Stories

इस कहानी में हमारे नन्हे शिशुओं के लिए कुछ सीख भी छिपी हुई होगी, जिसे पढ़कर वे अपने आने वाले पलों को एक स्वीकार रूप में ढाल सकते हैं। Hindi Moral Stories में यह कहानी एक भूमि से संबंधित व्यक्ति की है जिन्हें सरल भाषा में व्यक्ति किसान कहते हैं।

यह किसान है श्याम लाल। श्याम लाल परिश्रम करने में बेहद अग्रिम रहता है। श्याम लाल की परिश्रम देख उसपर ईश्वर की कृपा थी। ईश्वर ने उसे दो मटके सौंपे थे। हालांकि यह मटके कुछ खास या अलग नहीं थे परन्तु यह दोनों मटके आपस में मनुष्य के भांति अपने भाव प्रकट एवं बोल सकते थे। यह Hindi Moral Stories की कहानी इन दोनों मटकों के माध्यम से ही बताई गई है।

प्रारंभ करते हैं यह कहानी खंड Hindi Moral Stories: मटका फूट पड़ा

श्याम लाल का जीवन बेहद चुनौती से भरपूर रहा। उसका बचपन पास के ही ग्रामीण क्षेत्र में गुजरा। परन्तु उस समय जात का बोल बाला काफी था। श्याम लाल नीच जाति से तालुक्कत रखता था। जिसके कारणवश श्याम लाल के गांव वालों ने उसे अपने गांव से बाहर निकाल दिया।

उसके माता पिता की उम्र के कारण मृत्यु हो चुकी थी। अब उसने अपना बसेरा गांव से दूर कर लिया। यह जगह गांव के भीतर नहीं गिना जाता था बल्कि यह एक बंजर जमीन थी। जहां फसल उगने की कोई उम्मीद न के बराबर थी। उसकी फसल जो कि उसके गांव वाले गृह के समीप थी।

वहां उसे कार्य करने की अनुमति मिल गई, परन्तु शर्त यह रखी गई, उसे खेती करने के लिए कर देना होगा अथवा अपने उगाई हुई फसल सस्ते दामों में हमे बेच देना होगा। श्याम लाल थोड़ा सहमा क्योंकि उसके पास अब जीवन व्यापन करने के लिए वह खेत ही था।

वह चाहता तो खेत को कुछ राशि में समर्पित करके भी अपने कुछ पल जी सकता था। परन्तु उस खेत में उसकी माँ और उसके पिता की यादें समाई हुई थी। वह सब्जी को बाजार से कम लागत के मूल्य में बेचने को तैयार हो गया। अब उसकी यह दिनचर्या ही हो गई।

जिसमें वह प्रातः जागकर अपने गांव में मेहनत मजदूरी करने आ जाता था। श्याम लाल की मेहनत देख अधिक्तर प्रवासी अचंभित रह जाते। इसके पीछे कारण था क्योंकि यह सभी को ज्ञात था कि श्याम लाल को इस खेत से ज्यादा आर्थिक सहायता नहीं मिल रही, फिर भी इसके बावजूद वे इतना परिश्रम कर रहा है। 

श्याम लाल को ईश्वर का बहुत सहारा रहता। उसने अपने छोटी सी कुटिया में अपने दो मटकों के अलावा एक छोटा मंदिर एवं एक छोटे से स्थान स्वंय के लिए रखता। वह हर शाम जब भी गांव से वापस लौट रहा होता वे ईश्वर को चढ़ाने हेतु गांव से फूल ले आता। 

आरंभ में तो उसे कोई नहीं टोकता परन्तु जब यह दृश्य गांव के प्रधान ने देखा तो वह आग बबूला हो गया वह शीघ्र ही श्याम लाल को धमकी देते हुए कहता है कि ” श्याम लाल, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई गांव के पुष्पों को अपने साथ ले जाने की। 

श्याम लाल :- “जी!, मैं तो इन्हें केवल ईश्वर को समर्पित करने के लिए ले जाता हूँ।”

प्रधान:- ” इस गांव में तुम्हारा मात्र अपने खेत में खेती करना है और किसी अन्य जीव वस्तु को छूकर उसे दूषित करना नहीं।”

श्याम लाल को यह बात आहत हुई। वह रुआँसा सा मुख लिए अपने कुटिया में पहुंच जाता है। 

समय काल अपने गति से बढ़ता रहता है। वह अपने साथ सवेरे उन दो मटकों को लेकर निकलता है पानी भरने के बाद वापस ले आता है। वह अपने बल का भरपूर इस्तेमाल करता है परन्तु हर बार वह लेकर तो दोनों मटके जाता है, लेकिन जल की बूंदे मात्र डेढ़ मटके जितने ही होती है।

इसका कारण होता है एक मटके का दूषित होना अर्थात एक मटके में छेद होता है। दोनों मटकों के वार्तालाप करने का माध्यम भी ऊंच नीच से भरपूर होता है। जो मटका बिल्कुल सही स्थिति में है वह अपनी प्रशंसा करता रहता है उसे अपने स्वयं पर एक रूप से घमंड होता है।

वह कहता है ” देख!, मैं कितना अच्छा हूँ कि मुझमें कितनी क्षमता है, मैं पूरा जल सही सलामत कुटिया तक ला देता हूँ,बिना एक बून्द बर्बाद करें, परन्तु तू कितना खराब है, श्याम लाल इतनी मेहनत करके हमें लेकर जाता है और फिर वापस आते हुए उसे पूरा मटका पानी भी नहीं मिलता। 

यह बात सुनकर फटे हुए मटके को शर्मिंदगी महसूस हुई। वह यह बात श्याम लाल को बताना चाहता था। परन्तु घबराहट में उसने न बताना बेहतर समझा। वह स्वयं के बलबूते पर जल को बचाने के लिए कार्य करने लगा। 

जब श्याम लाल सवेरे दोनों मटकों को भर के वापस ला रहा होता, तो फूटा हुआ मटका खुद को थोड़ा टेड़ा कर लेता ताकि बूंद घड़े में ही रहे। ऐसा उसने एक हफ्ते तक किया परन्तु हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। 

एक दिन जब श्याम लाल जल से भर कर दोनों मटकों को लाया तो फिर फूटे हुए मटके में आधे जल की ही प्राप्ति हुई। इस पर थककर फूटे हुए मटके ने श्याम लाल को कहा “श्याम लाल, मैं आपसे क्षमा याचना करना चाहता हूँ, मैंने आपको बताया नहीं कि मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ, जिसके कारण आपके इतनी मेहनत विफल जाती है। 

श्याम लाल उदासी के समंदर में कूद गया उसे बेहद बुरा लगा, परन्तु अब वह क्या कर सकता था, उसके पास इतना पर्याप्त मात्रा में धन भी नहीं था कि वह एक मटका ले सके। उसे डेढ़ मटके जल से ही संतुष्ट होना था। 

उसी क्षण श्याम लाल के मस्तिष्क में एक युक्ति सूझी। वह जब अपनी जमीन में खेती करने गया तो उससे पहले वह गांव के प्रधान के पास पहुंचा और कहा कि “प्रधान जी!, आपसे एक गुहार है, महोदय आप जो मुझे मेरी खेती का मूल्य देते हैं उतने ही मूल्य का फूल के बीज देदेवें तो मेरे पर मेहरबानी होगी।”

प्रधान:- ” अवश्य!, दे सकते हैं किंतु अगर वह बीज तुमने अपने जमीन पर गाड़े तो उसमें उगे हुए फूल इस गांव के वासियों को ही समर्पित होंगे।”

श्याम लाल को तुरंत ही फूल के बीज मिल जाते हैं। श्याम लाल शाम को वापसी आते हुए अपने उस राह को थाम लेता हैं, जिसकी सहायता से वह कुएं में पानी भरने जाता था। उधर ही वह रास्ते में बीज गाड़ देता है। 

श्याम लाल अब सवेरे जल वापस लेकर जब आता है तब वह फूटा हुआ मटके को उस दिशा में कर देता है जहाँ उसने फूल के बीज डाले थे। ऐसा श्याम लाल हर दिवस करता है। अब वह प्रसन्न रहता है। उसकी प्रसन्नता देख दोनों मटके भी बेहद उल्लास से भरपूर हो जाते हैं।

फूटा हुआ मटका श्याम लाल से इस खुशियों का राज पूछता है तो श्याम लाल तेज गति से बाहर की ओर भागता है और तकरीबन पंद्रह मिनट के बाद वापस आता है। उसके हाथ में सुंदर पुष्प होते हैं भिन्न भिन्न रंग में। 

श्याम लाल :- यह है मेरी खुशी का कारण, मुझे तुम्हारे फूटे हुए का दुख हुआ, परन्तु उसके पश्चात मुझे ज्ञात हुआ कि विश्व मे हर शख्स, हर जीव जंतु में कुछ न कुछ कमी मौजूद हैं परन्तु इसके कारण हम उससे किनारा नहीं कर सकते।

जब तुम्हारे फूटे होने का मालूम हुआ तो मैंने गांव के प्रधान से फूल के बीज लेने का विचार किया। इन बीजों को मैंने कुएं वाले रास्ते के दोनों तरफ बिछा दिए। जिसके कारण जब भी हम आते तो तुम्हारे मटके में से निकलता हुआ जल उन बीजों को जल की पूर्ति करता। अर्थात इन फूलों को सींचता। 

आज तुम्हारे कारण मैं ईश्वर को सुंदर फूलों का अर्पण करने में सक्षम हूँ।”

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दोस्तों यह कहानी का अंतिम पल था। Hindi Moral Stories में लिखित यह कहानी सभी जीव जंतुओं की अहमियत को दर्शाता है। यह समाज का सत्य है कि कोई भी व्यक्ति पूर्ण रूप से सही नहीं है अर्थात कुछ न कुछ कमी हर व्यक्ति व जीव में पाई जाती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह व्यक्ति या जीव का जीवन व्यर्थ है। अगर दिमागी शक्ति से सोचा जाए हर व्यक्ति के भीतर कुछ अंदरूनी ताकत मौजूद है। सिर्फ नजर चाहिए उसे तलाशने की। 

उम्मीद है आपको यह Hindi Moral Story पसंद आई होगी। हमसे संपर्क में रहे और Hindi DNA की वेबसाइट पर आते रहें। क्योंकि हम हर दिन इस वेबसाइट पर नई नई कहानी Hindi Moral Stories प्रकाशित करते रहते हैं।

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