Top 10 Hindi Moral Stories – हर जीव का एक अलग ही महत्व होती है!

कहानियों का जन्म ठीक उसी वक्त हुआ था, जिस वक्त इस धरती की रचना हुई थी। इन प्रत्येक कहानियों में Hindi Moral Stories का स्थान बेहद प्रथम एवं इज्जत से लिया जाता है। इसी संदर्भ में इस पोस्ट में हजारों Hindi Moral Stories में से एक ऐसी कहानी का भेंट स्वरूप हमारे पाठकों को दिया जाएगा।

Hindi Moral Stories

इस कहानी में हमारे नन्हे शिशुओं के लिए कुछ सीख भी छिपी हुई होगी, जिसे पढ़कर वे अपने आने वाले पलों को एक स्वीकार रूप में ढाल सकते हैं। Hindi Moral Stories में यह कहानी एक भूमि से संबंधित व्यक्ति की है जिन्हें सरल भाषा में व्यक्ति किसान कहते हैं।

यह किसान है श्याम लाल। श्याम लाल परिश्रम करने में बेहद अग्रिम रहता है। श्याम लाल की परिश्रम देख उसपर ईश्वर की कृपा थी। ईश्वर ने उसे दो मटके सौंपे थे। हालांकि यह मटके कुछ खास या अलग नहीं थे परन्तु यह दोनों मटके आपस में मनुष्य के भांति अपने भाव प्रकट एवं बोल सकते थे। यह Hindi Moral Stories की कहानी इन दोनों मटकों के माध्यम से ही बताई गई है।

Hindi Moral Stories: मटका फूट पड़ा

श्याम लाल का जीवन बेहद चुनौती से भरपूर रहा। उसका बचपन पास के ही ग्रामीण क्षेत्र में गुजरा। परन्तु उस समय जात का बोल बाला काफी था। श्याम लाल नीच जाति से तालुक्कत रखता था। जिसके कारणवश श्याम लाल के गांव वालों ने उसे अपने गांव से बाहर निकाल दिया।

उसके माता पिता की उम्र के कारण मृत्यु हो चुकी थी। अब उसने अपना बसेरा गांव से दूर कर लिया। यह जगह गांव के भीतर नहीं गिना जाता था बल्कि यह एक बंजर जमीन थी। जहां फसल उगने की कोई उम्मीद न के बराबर थी। उसकी फसल जो कि उसके गांव वाले गृह के समीप थी।

वहां उसे कार्य करने की अनुमति मिल गई, परन्तु शर्त यह रखी गई, उसे खेती करने के लिए कर देना होगा अथवा अपने उगाई हुई फसल सस्ते दामों में हमे बेच देना होगा। श्याम लाल थोड़ा सहमा क्योंकि उसके पास अब जीवन व्यापन करने के लिए वह खेत ही था।

वह चाहता तो खेत को कुछ राशि में समर्पित करके भी अपने कुछ पल जी सकता था। परन्तु उस खेत में उसकी माँ और उसके पिता की यादें समाई हुई थी। वह सब्जी को बाजार से कम लागत के मूल्य में बेचने को तैयार हो गया। अब उसकी यह दिनचर्या ही हो गई।

जिसमें वह प्रातः जागकर अपने गांव में मेहनत मजदूरी करने आ जाता था। श्याम लाल की मेहनत देख अधिक्तर प्रवासी अचंभित रह जाते। इसके पीछे कारण था क्योंकि यह सभी को ज्ञात था कि श्याम लाल को इस खेत से ज्यादा आर्थिक सहायता नहीं मिल रही, फिर भी इसके बावजूद वे इतना परिश्रम कर रहा है। 

श्याम लाल को ईश्वर का बहुत सहारा रहता। उसने अपने छोटी सी कुटिया में अपने दो मटकों के अलावा एक छोटा मंदिर एवं एक छोटे से स्थान स्वंय के लिए रखता। वह हर शाम जब भी गांव से वापस लौट रहा होता वे ईश्वर को चढ़ाने हेतु गांव से फूल ले आता। 

आरंभ में तो उसे कोई नहीं टोकता परन्तु जब यह दृश्य गांव के प्रधान ने देखा तो वह आग बबूला हो गया वह शीघ्र ही श्याम लाल को धमकी देते हुए कहता है कि ” श्याम लाल, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई गांव के पुष्पों को अपने साथ ले जाने की। 

श्याम लाल :- “जी!, मैं तो इन्हें केवल ईश्वर को समर्पित करने के लिए ले जाता हूँ।”

प्रधान:- ” इस गांव में तुम्हारा मात्र अपने खेत में खेती करना है और किसी अन्य जीव वस्तु को छूकर उसे दूषित करना नहीं।”

श्याम लाल को यह बात आहत हुई। वह रुआँसा सा मुख लिए अपने कुटिया में पहुंच जाता है। 

समय काल अपने गति से बढ़ता रहता है। वह अपने साथ सवेरे उन दो मटकों को लेकर निकलता है पानी भरने के बाद वापस ले आता है। वह अपने बल का भरपूर इस्तेमाल करता है परन्तु हर बार वह लेकर तो दोनों मटके जाता है, लेकिन जल की बूंदे मात्र डेढ़ मटके जितने ही होती है।

इसका कारण होता है एक मटके का दूषित होना अर्थात एक मटके में छेद होता है। दोनों मटकों के वार्तालाप करने का माध्यम भी ऊंच नीच से भरपूर होता है। जो मटका बिल्कुल सही स्थिति में है वह अपनी प्रशंसा करता रहता है उसे अपने स्वयं पर एक रूप से घमंड होता है।

वह कहता है ” देख!, मैं कितना अच्छा हूँ कि मुझमें कितनी क्षमता है, मैं पूरा जल सही सलामत कुटिया तक ला देता हूँ,बिना एक बून्द बर्बाद करें, परन्तु तू कितना खराब है, श्याम लाल इतनी मेहनत करके हमें लेकर जाता है और फिर वापस आते हुए उसे पूरा मटका पानी भी नहीं मिलता। 

यह बात सुनकर फटे हुए मटके को शर्मिंदगी महसूस हुई। वह यह बात श्याम लाल को बताना चाहता था। परन्तु घबराहट में उसने न बताना बेहतर समझा। वह स्वयं के बलबूते पर जल को बचाने के लिए कार्य करने लगा। 

जब श्याम लाल सवेरे दोनों मटकों को भर के वापस ला रहा होता, तो फूटा हुआ मटका खुद को थोड़ा टेड़ा कर लेता ताकि बूंद घड़े में ही रहे। ऐसा उसने एक हफ्ते तक किया परन्तु हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। 

एक दिन जब श्याम लाल जल से भर कर दोनों मटकों को लाया तो फिर फूटे हुए मटके में आधे जल की ही प्राप्ति हुई। इस पर थककर फूटे हुए मटके ने श्याम लाल को कहा “श्याम लाल, मैं आपसे क्षमा याचना करना चाहता हूँ, मैंने आपको बताया नहीं कि मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ, जिसके कारण आपके इतनी मेहनत विफल जाती है। 

श्याम लाल उदासी के समंदर में कूद गया उसे बेहद बुरा लगा, परन्तु अब वह क्या कर सकता था, उसके पास इतना पर्याप्त मात्रा में धन भी नहीं था कि वह एक मटका ले सके। उसे डेढ़ मटके जल से ही संतुष्ट होना था। 

उसी क्षण श्याम लाल के मस्तिष्क में एक युक्ति सूझी। वह जब अपनी जमीन में खेती करने गया तो उससे पहले वह गांव के प्रधान के पास पहुंचा और कहा कि “प्रधान जी!, आपसे एक गुहार है, महोदय आप जो मुझे मेरी खेती का मूल्य देते हैं उतने ही मूल्य का फूल के बीज देदेवें तो मेरे पर मेहरबानी होगी।”

प्रधान:- ” अवश्य!, दे सकते हैं किंतु अगर वह बीज तुमने अपने जमीन पर गाड़े तो उसमें उगे हुए फूल इस गांव के वासियों को ही समर्पित होंगे।”

श्याम लाल को तुरंत ही फूल के बीज मिल जाते हैं। श्याम लाल शाम को वापसी आते हुए अपने उस राह को थाम लेता हैं, जिसकी सहायता से वह कुएं में पानी भरने जाता था। उधर ही वह रास्ते में बीज गाड़ देता है। 

श्याम लाल अब सवेरे जल वापस लेकर जब आता है तब वह फूटा हुआ मटके को उस दिशा में कर देता है जहाँ उसने फूल के बीज डाले थे। ऐसा श्याम लाल हर दिवस करता है। अब वह प्रसन्न रहता है। उसकी प्रसन्नता देख दोनों मटके भी बेहद उल्लास से भरपूर हो जाते हैं।

फूटा हुआ मटका श्याम लाल से इस खुशियों का राज पूछता है तो श्याम लाल तेज गति से बाहर की ओर भागता है और तकरीबन पंद्रह मिनट के बाद वापस आता है। उसके हाथ में सुंदर पुष्प होते हैं भिन्न भिन्न रंग में। 

श्याम लाल :- यह है मेरी खुशी का कारण, मुझे तुम्हारे फूटे हुए का दुख हुआ, परन्तु उसके पश्चात मुझे ज्ञात हुआ कि विश्व मे हर शख्स, हर जीव जंतु में कुछ न कुछ कमी मौजूद हैं परन्तु इसके कारण हम उससे किनारा नहीं कर सकते।

जब तुम्हारे फूटे होने का मालूम हुआ तो मैंने गांव के प्रधान से फूल के बीज लेने का विचार किया। इन बीजों को मैंने कुएं वाले रास्ते के दोनों तरफ बिछा दिए। जिसके कारण जब भी हम आते तो तुम्हारे मटके में से निकलता हुआ जल उन बीजों को जल की पूर्ति करता। अर्थात इन फूलों को सींचता। 

आज तुम्हारे कारण मैं ईश्वर को सुंदर फूलों का अर्पण करने में सक्षम हूँ।”

Hindi Moral Stories: एक रुपये का ईश्वर

एक छोटा बालक पंसारी की दुकान पर जाता है और पंसारी को एक रुपये देकर कहता है “ सेठ जी क्या मुझे 1 रुपये में ईश्वर मिल जायेंगे”। पंसारी बच्चे की बात सुनकर क्रोधित हो जाता है ,उसे लगता है की बच्चा उससे मजाक कर रहा है।

पंसारी उसे एक रुपये थमा वहाँ से भगा देता है। बच्चा फिर दूसरे दुकान पर जाता है दूसरा दुकानदार भी बच्चे के साथ बुरा बर्ताव करता है और उसे वहाँ से भगा देता है।

बचा इसी तरह दो से तीन, तीन से चार करते करते चालीस दुकानदारों के पास जाता है ,कोई उसपर हंसता है तो कोई ऊपर से नीचे तक घूरता है तो कोई उसका मज़ाक बनाता , अंत में सभी उसे चलता करते है।

बच्चा पसीने से लथ-पथ होकर निराश होकर बैठ जाता है। बच्चे को सड़क किनारे एक छोटी सी दुकान दिखाई देती है ,जिसमें एक बुजुर्ग बैठा होता है।

“बच्चा वहाँ जाता है और बोलता है “ बाबा एक रुपये में ईश्वर मिलेगा क्या”? बाबा बच्चे की बात सुनकर मुसकुरा देते है और कहते है “हाँ बिलकुल मिलेगा परन्तु तुम ईश्वर का करोगे क्या”? लड़का कहता है “मेरी माँ बहुत बीमार है वो अस्पताल में भर्ती है ,डॉक्टर अंकल ने कहा है की मेरी माँ को सिर्फ ईश्वर ही बचा सकता है”।

बच्चे की बात सुनकर बुजुर्ग उससे एक रुपये ले लेता है और कहता है “तुम जाओ ईश्वर तुम्हारी माँ को जरूर बचा लेगा”।  अगली सुबह बच्चे की माँ को देखने बाहर से बड़े डॉक्टर आते है और उसका आपरेशन करते है। बच्चे की माँ ठीक हो जाती है।

जब डॉक्टर दवाइयों और आपरेशन का बिल बच्चे की माँ को देते है तो उसका होश ही उड़ जाता है क्योंकि बिल लाखों में होता है और कोई उसे चूका चुका होता है।

माँ को बड़ी हैरानी होती है की आखिर उसका इतना लंबा बिल चुकाया किसने? ? बिल के साथ एक ख़त होता है जिसमें लिखा होता है “शुक्र है उस नन्हे बच्चे का जो एक रूप में ईश्वर को ढूंढता हुआ मेरे पास आया, मैंने आपको नहीं बचाया है वो ईश्वर ही है जिसने आपकी मदद की है ,तो ईश्वर को आप धन्यवाद जरूर करना”।

असल में वो ख़त उसी बुजुर्ग बाबा ने लिखा होता है जो सारा बिल स्वयं भर के जाता है ।वो  नन्हे से बच्चे का ईश्वर के प्रति उसका भरोसा कायम रखना चाहते थे इसलिए उन्होंने अस्पताल का सारा बिल खुद अदा किया। 

निष्कर्ष- ईश्वर खुद धरती पर नहीं आ सकता था इसलिए उसने दुनिया में कई नेकदिल इंसान बनाए। वो नेकदिल कोई भी हो सकता है ,आप मैं या कोई और।

अगर बुजुर्ग चाहता तो दरों की तरह वो भी बच्चे को वहाँ से डांट कर भगा सकता था परन्तु उसने ईश्वर के प्रति उस बच्चे की आस्था का सम्मान किया और मानवता का नेक रूप प्रस्तुत किया वास्तव में ऐसे इंसान ही ईश्वर के बनाए फ़रिश्ते होते है जो धरती पर लोगों की मदद करने के लिए भेजे गए होते है। 

फूट  वीर ने बाल्टी को पकड़ा और जय ने पूरी जान लगा दी  अपने दोस्त को बचाने में |हालाँकि  जय की उम्र वीर की उम्र से 8 साल कम थी |

लेकिन जय के अन्दर इतनी ताकत कहा से आई की वो अपने से 5 साल बड़े दोस्त  को बाल्टी के साथ कुएं से खींच लिया ? क्योंकि जब भी इंसान के पास कोई मुश्किल आती है तो इंसान अपनी पूरी ताक़त लगा देता है उससे जितने के लिए

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की संकट के समय हमें अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि हम कोई भी मुसीबत का मुकाबला कर सके।

Hindi Moral Stories: हजारों मिल की यात्रा

 ये बात सर्व ज्ञात है की अपने बौद्ध जीवन के आरंभिक काल से ही गौतम बुद्ध अपने सबसे प्रिय शिष्य आनंद के साथ प्रवचन देने जाते थे। एक बार गौतम बुद्ध को प्रवचन देने किसी गाँव में जाना था उन्होंने आनंद को यात्रा की तैयारी करने के आदेश दिए।

बुद्ध और आनंद गाँव की यात्रा पर निकल पड़े। आनंद को बुद्ध के साथ साथ ऐसे गाँव में जाना था जिसका पता उसे नहीं था और न उसमें इतनी हिम्मत थी वो बुद्ध से ये सवाल पूछ सकें।

गाँव के लिए चलते चलते दोपहर हो गई परन्तु गाँव का कुछ अता पता नहीं था। कड़ी धूप थी और एक किसान अपने खेत में काम कर रहा था। आनंद ने बुद्ध से पूछा “ गुरुदेव चलते चलते इतना वक़्त गुजर गया पर अब तक हमें गाँव का कुछ अता पता नहीं चला क्यों न हम किसी से पूछ से”?

बुद्ध किसान के पास गए और उससे गाँव का पता पूछा, किसान के कहा “आप लोग बहुत करीब हो सिर्फ दो किलोमीटर और चलना है” इतना कह कर वो बुद्ध की तरफ देखकर मुसकुरा दिया उत्तर में बुद्ध भी मुसकुरा दिए।

आनंद को कुछ समझ नहीं आ रहा था की आखिर दोनों एक दूसरे को देख कर हंसे क्यों ? बुद्ध और आनंद दो किलोमीटर और चले परन्तु गाँव नहीं आया। रास्ते में एक बुढ़िया लड़की काट कर जंगल से घर जा रही थी।

बुद्ध ने उससे भी गाँव का पता पूछा ,बुढ़िया ने कहा “ बस ज्यादा नहीं चलना है मुश्किल से दो किलोमीटर भी नहीं होगा और बुद्ध को देखकर वो मुसकुरा दी, बुद्ध भी प्रति उत्तर में मुसकुरा दिए। आनंद को कुछ समझ नहीं आ रहा था की चल क्या रहा है, वो पूछ सकता नहीं था ,क्योंकि बुद्ध से साफ़ हिदायत थी की फिजूल के सवाल नहीं पूछना है।  

दोनों दो किलोमीटर और चले फिर भी गाँव नहीं आया। आगे एक फल विक्रेता पेड़ की छाव में आम बेच रहा था। बुद्ध ने उससे भी ठीक वही सवाल किया।

आम विक्रेता ने कहा “महाराज आपका सफ़र खत्म होने वाला है बस आपको 1 मिल मुश्किल से और चलना होगा”। आनंद ये सुन कर थक चूका था दो किलोमीटर दो किलोमीटर फिर भी किसी तरह हिम्मत करके उसने दो किलोमीटर और चलने का निश्चय किया।

शाम हो चुकी थी परन्तु ये दो किलोमीटर का सिलसिला खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। दो किलोमीटर और चलने के पश्चात जब गाँव नहीं आया तो आनंद के सब्र का बांध टूट गया।

तेज धूप और गर्मी की वजह से वो काफी थक चूका था। क्रोध की मुद्रा में उसने अपना झोला पटकते हुए कहा “गुरुदेव माफ़ी चाहता हूँ परन्तु मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता और न चल सकता हूँ, ये दो किलोमीटर है की खत्म ही नहीं हो रहा और न आप कुछ सही सही बता रहे है जिससे भी आप पूछते है वो दो किलोमीटर बोल कर मुसकुरा देता है।

आनंद क्रोध की मुद्रा में अपने सवालों के जवाब जानना चाह रहा था। आनंद का उतावलापन देख कर बुद्ध मुसकुरा दिए वो जानते थे की आनंद थक चूका है।

उन्होंने कहा “मैं जानता हूँ की गाँव अगले दो किलोमीटर बाद भी नहीं है ,मैं ये भी जानता था की गाँव हमारे यात्रा के स्थान से २० किलोमीटर दूर था परन्तु अगर मैं तुम्हें ये कहता की हमें 20 किलोमीटर चलना है तो हमने जो 6 किलोमीटर तय किया  है वो भी हम नहीं चल पाते।

वो लोग जो तुम्हें रास्ते में मिले थे वो झूठ नहीं बोल रहे थे बल्कि तुम्हारा मनोबल बढ़ा रहे थे। उन तीनों के कहने से हम दो दो किलोमीटर करके 6 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुके है।

उन्होंने तो हमें चलने के लिए प्रोत्साहित किया है। वो सभी जानते थे की अगले दो किलोमीटर बाद भी कोई गाँव नहीं है परन्तु हमें सफ़र की दूरी से थकावट न हो इसलिए सभी ने सिर्फ दो- दो किलोमीटर कहा।

असल में ये वही लोग है जो आपको आपकी मंजिल तक पहुँचाने में आपकी सहायता करते है तो इनका धन्यवाद करो। आनंद बुद्ध की सारी बात समझ चुका था की बुद्ध उसे क्या समझाना चाहते थे। झुककर उसने गुरु के चरण स्पर्श किए और रात वही रुकने के लिए प्रबंध करने चला गया।  

निष्कर्ष- हम सभी की जिंदगी में कुछ लोग ऐसे होते है जो हमारी असफलता के बाद भी हमसे कहते है की ‘बस थोड़ा और चलो’ ‘थोड़ा और करो’ असल में ये वो लोग होते है जो हमें हमारे अगले प्रयत्न के लिए प्रोत्साहित करते है। ये हमारे लिए सबसे बड़े हितकारी होते है तो अगली बार आपसे कोई यदि ये कहे की ‘बस थोड़ी दूर’ तो समझ जाइए की वो आपको आपकी मंजिल तक पहुँचने के लिए आपका मनोबल बढ़ा रहा रहा है।

Hindi Moral Stories: जैसी माटी वैसा भेष

 चार अंधे आदमी एक बार राजा के पास गए। राजा ने उन्हें एक हाथी भेंट किया और उन्हें यह बताने के लिए कहा कि उन्हें उपहार स्वरूप मिली चीज़ क्या है। पूंछ के पास खड़े अंधे आदमी ने उसे छुआ तो उसे पूंछ रस्सी की तरह लगी, उसने उसे रस्सी बताया।

पैर के पास खड़े आदमी को हाथी का पाँव किसी पेड़ के तने की तरह लगा उसने उसे पेड़ का तना बताया। ट्रंक के पास खड़े व्यक्ति ने मुलायम और लम्बा होने की वजह से ट्रंक को एक सांप माना, पेट के पास खड़े व्यक्ति को हाथी का पेट किसी मोटी दीवार की तरह लगा उसने उसे दीवार माना। अलग अलग मत होने की वजह से चारो में बहस छिड़ गई। 

संदेश 

नैतिकता ये है की जिंदगी के बारे में हर किसी की अपनी अपनी सोच होती है। जो जितना सोचता है ,या जितना ग्रहण करता है उसी के अनुरूप वो जिंदगी जीता है। जिंदगी पूरी तरह आपकी सोच पर निर्भर करती है।

किसी को जिंदगी की मुश्किलें एक सीख की तरह लगती है तो कोई पूरी उम्र मुश्किलों को कोसता रहता है। कोई मुसीबत को स्वाभाविक मानता है तो कोई इन्हें जीवन में कील की तरह लेता है।  

वास्तविकता सिर्फ इतनी है जो जिंदगी को जितना समझता है उसे जिंदगी के उतार चढ़ाव उसी अनुरूप दिखाई देते है, इसलिए अपनी सोच हमेशा सकारात्मक रखे।      

Hindi Moral Stories: सामर्थ्य से शक्ति 

 भगवान राम लंका पर हमला करने से पहले एक पुल का निर्माण कर रहे थे। एक गिलहरी समुद्र के किनारे से रेत के छोटे छोटे कण अपने शरीर पर लाती और जहाँ पुल की आधार शिला रखी जा रही थी वहाँ डाल देती।

बंदरों, संतो और राम के अनुयायियों ने भगवान राम से गिलहरी वाली घटना का वर्णन किया। भगवान राम गिलहरी के पास गए और उसके ऐसा करने का कारण पूछा।

गिलहरी ने कहा “ वो लंका पर विजय की खातिर ऐसा कर रही है”। प्रभु ने कहा, “ये रेत के छोटे छोटे कण भला मेरी क्या मदद करेंगे”।गिलहरी ने उत्तर दिया, “मैं आपसे क्षमा चाहती हूँ, प्रभु, रेत के दाने पर्याप्त या कम हैं, मुझे इसकी थाह नहीं है , लेकिन मुझे पता है कि मैं अपने सभी स्तरों को बेहतर बनाने के लिए अपने स्तर पर योगदान देने की कोशिश कर रही हूँ।”

भगवान राम अभिभूत हो गए। एक गिलहरी के मुख से उसके जीवन का सामर्थ्य और समर्पण के भाव ने भगवान राम को करुणा से परिपूर्ण कर दिया। राम ने प्यार से उसकी पीठ थपथपाई।

ऐसी मान्यता है की गिलहरी के शरीर पर जो धारियां होती है वो भगवान राम की उंगलियों के निशान हैं। संदेश  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका कार्य बड़ा है या छोटा। मायना ये  रखता है कि आप उसे समर्पण और उत्साह के साथ करते हैं या नहीं।

अगर आप उत्सुक हैं, आपके उत्साह है और आप उत्साही हैं तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। उत्साही लोग बचपन से बुढ़ापे तक सकारात्मक प्रयास करते हैं और सराहनीय स्थान हासिल करते हैं।

Hindi Moral Stories: प्यार की जीत

ये कहानी है उस शख्स की जिसने प्यार जैसी पवित्र चीज़ के मायने को अपनी चाहत, अपने बलिदान से और पवित्र बना दिया। ये कहानी उन लोगों को लिए भी है जिन्हें प्यार पर यकीन नहीं होता और जिनके लिए भावनाएँ किसी कागज़ के टुकड़े की तरह होती है।

यकीनन ये कहानी हर उस शख्स का विश्वास जीत लेगी जिसका भरोसा प्यार से उठा चुका है। एक व्यक्ति जिसका टूर एंड ट्रेवल्स का कारोबार होता है लोगो को सस्ती दरों पर पुरे भारत की यात्रा कराता है।

वो अपने शहर का एक नामी टूर एंड ट्रेवल बिजनेसमैंन होता है। एक बार एक महिला उसके पास आती है और बताती है की वो और उसके दोस्तों का एक समूह चार धाम की यात्रा पर जाना चाहता है। महिला व्यक्ति से टिकटो की व्यवस्था करने को कहती है।

व्यक्ति राजी हो जाता है। घर जाकर टूर एंड ट्रेवल एजेंसी का मालिक अपनी बीवी से कहता है की एक समूह चार धाम की यात्रा पर जा रहा है क्यों न हम भी चले। बीवी मान जाती है , व्यक्ति अपनी पत्नी और 30 अन्य सदस्यों के साथ चार धाम की यात्रा पर निकल पड़ता है।

यात्रा शुरू होती है बद्रीनाथ से। दिन 16 जून वर्ष 2013 बदरीनाथ में भयंकर तूफ़ान और बाढ़ आ जाती है और सबकुछ बहा कर ले जाती है । उस व्यक्ति की पत्नी उसी तूफ़ान में लापता हो जाती है। हजारों लोग मारे जाते है  ,कई डूब जाते है  ,कई लापता हो जाते है।

हर तरफ चीख पुकार की आवाज़े गूंज रही होती है ,जिसे सुनने वाला कोई नहीं होता है। व्यक्ति एकदम पागल सा हो जाता है । पुरे बदरीनाथ में वो महीनों तक अपनी पत्नी की फोटो दिखा कर सबसे पूछता रहता है परन्तु उसकी पत्नी की कोई खबर नहीं मिलती।

सरकार से तो उसे कोई उम्मीद थी नहीं इसलिए वो अपने स्तर पर ही खोजबीन को जारी रखता है। वो अपनी सारी जमीन जायदाद को बेच देता है  और एक अस्थाई तंबू लगा कर वही रहने लगता है।

उसके मन में एक विश्वास होता है की उसकी पत्नी जिंदा होगी। वो  उसे अकेला छोड़ कर नहीं जा सकती। दिन भर वो उसकी खोजबिन करता और रात भर उसकी यादों से लड़ता रहता।

ईश्वर से दुआ करता ,रोता आंसू बहाता और फिर चुप हो जाता पर उम्मीद नहीं छोड़ता। महीनों बीत गए पर कुछ मालूम न चला। घर वालों ने उसे बहुत समझाया परन्तु वो न माना। उसने अपनी पत्नी के प्रति अपने अटूट प्रेम को कमजोर नहीं पड़ने दिया।

घर वालो ने तो उसे पागल घोषित कर दिया परन्तु उसने उसे ढूँढना नहीं छोड़ा।  कुछ महीने बाद सरकार आपदा में मरने वालो की लिस्ट निकालती है जिसमे उसकी पत्नी का भी नाम होता है।

सरकार उसे मुआव्जा देती है पर वो उसे काबुल नहीं करता। उसका मानना था की उसकी पत्नी जिंदा है तो वो मुआव्जा क्यों ले। काफी दिन बीत गए पर व्यक्ति उत्तराखंड नहीं छोड़ता वो वही बस जाता है।

दिन 21 जनवरी वर्ष 2015 ,शाम का वक़्त उसके फ़ोन पर एक कॉल आती है, कॉल करने वाला व्यक्ति बताता है की उसने एक महिला को देखा है जो बिलकुल उसकी पत्नी की तरह दिखती है, उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं लगती।

वो कई दिनों से सड़क पर यहाँ वहाँ घूम रही है। व्यक्ति बिना वक़्त गवाए वहाँ पहुँचता है  ,जब वो उस महिला को देखता है खुद को रोक नहीं पाता और उसे गले लगा लेता है। वो वाकई में उसकी पत्नी होती है।

व्यक्ति जी भर के रोता है, ईश्वर का धन्यवाद देता है, उसे इस बात का दुःख नहीं होता की उसकी पत्नी किस अवस्था में होती है बल्कि वो इस बात से खुश होता है की उसने उसे दुबारा पा लिया था ,वो दुबारा उसके पास वापस आ गई थी।  

ये कहानी कोई काल्पनिक कहानी नहीं बल्कि राजस्थान के धीरेन्द्र और उनकी पत्नी लीलावती (परिवर्तित नाम) की है। यही वो जोड़े है जो बदरीनाथ गए और तूफ़ान में बिछड़ गए।

उसके पति का प्रेम ही था जिसने उसकी पत्नी को 2 साल तक अनजान जगह और अनजान लोगो के बीच उसे जिंदा रखा था। प्रेम में वाकई बहुत ताकत होती है ये वही महसूस कर सकता है जिसने कभी सच्चा प्रेम किया हो।  

Hindi Moral Stories: बदसूरत राजा

 बहुत समय पहले की बात है एक नगर में बड़ा ही दयालु राजा हुआ करता था। राजा अपनी प्रजा का पूरा ख्याल रखता था। उनकी सारी जरूरतें और उनके सूख दुःख में हमेशा उनका साथ देता था।

राजा सभी की ख़ुशी खा ख्याल रखता परन्तु  अन्दर से वो खुद बहुत दुखी रहता, उसकी वजह थी उसकी एक आँख और एक टांग का न होना। एक दिन राजा अपने महल के संग्रहालय में अपने पूर्वजों की फोटो देख रहा था।

वो सोच रहा था की उसके दादा, पड़दादा और उसके पूर्वज कितने बहादुर हुआ करते थे। महल की दीवारों पर पीड़ी दर पीड़ी की फोटो लगी हुई थी। राजा सभी की फोटो देखते हुए आगे बढ़ रहा था अंत में उसे एक खाली फ्रेम दिखा जिसे देखकर  वो दुखी हो गया।

उसने सोचा की अगली बारी उसकी है, वो खाली फ्रेम भविष्य में होने वाली उसकी मौत की याद दिला रहा था। राजा ने सोचा की सभी की फोटो एक से बढ़कर एक है। सब फोटो में बहादुर और शूरवीर दिख रहे है।

क्यों न मैं जीते जी अपनी एक सुंदर सी फोटो बनवा लूँ क्योंकि अगर मैं मर गया तो बदसूरत सी फोटो इस फ्रेम में लगेगी जो मैं बिलकुल नहीं चाहता। राजा ने नगर में घोषणा करवा दी की जो उसकी सबसे सुंदर फोटो बनाएगा उसे बहुत सारा इनाम दिया जाएगा।

नगर के नामी चित्रकारों तक ये बात पहुंची तो वो खुश हो गए परन्तु दूसरे ही पल वो मायूस भी हो गए। उन्हें लगा की भला वो राजा की क्या क्या खाक सुंदर तस्वीर बनायेंगे न तो उसकी एक आँख है और न ही एक पैर, फिर भला कोई कैसे उसकी सुंदर तस्वीर बना सकता है और अगर तस्वीर अच्छी नहीं बनी तो राजा तो सूली पर ही लटका देगा।

इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए किसी ही चित्रकार ने राजा की तस्वीर बनाने की हिम्मत नहीं दिखाई। इसी बीच राजा के दरबार में एक 16 साल का लड़का आया और उसने राजा की पेटिंग बनाने के का प्रस्ताव रखा।

राजा को पहले तो संशय हुआ की ये कर पायेगा या नहीं पर उन्होंने उसे एक मौका देने का फैसला किया। लड़के ने राजा की पेंटिंग बना कर तैयार कर दी। वो दिन आ गया जब लड़का राजा को पेंटिंग सौपने वाला था।

राज दरबार पुरा भरा हुआ था ,सभी लोग बड़ी उत्सुकता से लड़के के आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही लड़के ने पेंटिंग राजा को दिखाई ,राजा की आँखों में चमक आ गई ,राजा उस पेंटिंग को देखता ही रह गया।

राजा ने उस पेंटिंग की खूब तारीफ़ की और लड़के की कला और दिमाग को दाद दिया। लड़के को उसकी बहादुरी ,निडरता और कला के लिए खूब सारा ईनाम दिया गया।

सभी चित्रकार और दरबारी बड़े हैरान थे की आखिर पेटिंग में उसने ऐसा क्या बना दिया की राजा इतना प्रसन्न हो गया। जब चित्रकारों ने उस पेंटिंग को देखा तो उनकी भी आँखे चमक गई।

लड़के ने राजा को एक घोड़े पर दिखाया हुआ था , घोड़े का वो हिस्सा आगे की तरफ था जिधर राजा की एक टांग थी ,राजा के हाथ में तीर और कमान था, वो तीरंदाजी की मुद्रा में थे। राज जिस आँख से अँधा था उसे बंद दिखाया गया था।

जैसे एक तीरंदाज़ निशाना लगाते वक़्त एक आंख बंद कर लेता है ठीक वैसे ही राजा को वैसे दिखाया गया था। राजा पेंटिंग में एक कुशल और बहादुर तीरंदाज़ की भूमिका में था। सभी चित्रकार लड़के की बुद्धिमता ,उसके साहस और उसके ज्ञान की भूरी भूरी प्रशंसा कर रहे थे।  

निष्कर्ष- जिस काम को बड़े बड़े चित्रकार एक मुसीबत की तरह ले रहे थे उसे लड़के ने अवसर में बदल दिया। हमारी जिंदगी भी कुछ इस तरह ही होती है वो काम जो कोई नहीं कर सकता अगर उसे हम खुद के लिए अवसर में बदल दे तो वो ही हमारे लिए ईश्वर का वरदान बन जाता है।

Short moral stories in Hindi: ईश्वर की लीला

एक व्यक्ति अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहता था। अपने जीवन से वो बड़ा परेशान था क्योंकि उसके पास जीविका का कोई ऐसा माध्यम न था जिससे वो अपना और अपने परिवार का पेट पाल सके।

वो ईश्वर से रोज़ दुआ करता ,खूब पूजा पाठ करता और उनसे कहता की वो उसकी नौकरी की व्यवस्था कर दे, थोड़े से मेहरबान हो जाए। उसकी छोटी सी बच्ची भी उसके साथ दुआ करती। दिन यूँ ही बीत रहे थे परन्तु कोई समाधान नहीं निकल रहा था।

एक दिन उसकी बच्ची ने उससे आकर पूछा “पापा मेरी क्लास के सभी बच्चे हंसी ख़ुशी रहते है, सभी के मम्मी पापा के पास नौकरी है, घर है , सूख शांति है हमारे घर में आखिर सब अच्छा कब होगा”? बच्ची की बात सुनकर व्यक्ति उसे घर से बाहर ले गया और घर के सामने सीना तान खड़े पहाड़ों को दिखाते हुए बोला “

वो पहाड़ देख रही हो ,वहाँ भगवान जी रहते है ,तुम उनसे दुआ करो की वो सब कुछ ठीक कर दे अगर तुम सच्चे दिल से दुआ करोगी तो वो जरूर सुनेंगे”। बच्ची छोटी थी  उम्र के हिसाब से वो सच मान गयी की उन पहाड़ों में भगवान रहते है।

वो रोज़ दुआ करती ,उसकी दुआ के फलस्वरूप व्यक्ति की सेना में नौकरी लग गई। सब कुछ ठीक हो गया, सब हँसी ख़ुशी रहने लगे। कुछ ही दिन बीते होंगे की पड़ोसी देश की सेना ने उसके देश पर हमला कर दिया। न चाहते हुए भी उसके देश को युद्ध में भाग लेना पड़े।

व्यक्ति को युद्ध के लिए जाना था पूरा घर चिंतित था ,युद्ध ताकतवर देश से था इसलिए सब डरे हुए थे की ना जाने क्या होगा? खास कर उस आदमी की वो छोटी बच्ची।

बच्ची ने अपने पापा से कहा “ पापा न जाने मैंने आपके लिए ऐसी जॉब क्यों मांगी इससे तो अच्छा होता की आप यूँ ही रहते ये कहते कहते वो रो पड़ी”। व्यक्ति ने उसे चुप कराया।

जब वो घर से जाने लगा तो लड़की ने उसे एक ख़त दिया और बड़ी मासूमियत से कहा “पापा आप उन पहाड़ों से होकर ही जायेंगे न मेरा ये चिट्ठी भगवान जी को दे दीजियेगा”। व्यक्ति जल्दी में था उसने वो चिट्ठी रखी और चल दिया।

जब वो पहाड़ से गुजर रहा था उसे अपने देश का आखिरी पोस्ट ऑफिस मिला उसके आगे उसके देश की सीमा खत्म हो रही थी ,उसे नहीं मालूम था की वो वापस लौट पायेगा या नहीं इसलिए उसने अपनी बच्ची का भ्रम दूर करने कल लिए उस चिट्ठी पर लिख दिया “ मेरी प्यारी बेटी, मुझे माफ़ करना मैंने तुमसे झूठ बोला यहाँ कोई भगवान नहीं रहते, बहुत सारा प्यार मेरी बेटी को” इतना लिख कर उसने चिट्ठी बाक्स में डाल दी। दोनों देशों के बीच भीषण युद्ध छिड़ गया।

जिस टुकड़ी में वो गया था वो उसके सभी जवान धीरे धीरे करके मारे गए। अगले दिन अख़बार में खबर छपी की जो टुकड़ी यहाँ से युद्ध के लिए गई थी उसके सभी जवान मारे गए।     

सभी को खबर हो गयी ,व्यक्ति की बीवी को भी पता लग गया की उसका पति मारा गया। परन्तु उसमें इतनी हिम्मत न थी की वो  बच्ची को  उसके पिता की मौत की खबर सुना पाए ।

एक दिन दरवाजे की घंटी बजती है ,जैसे ही छोटी बच्ची दरवाजा खोलती है एक फटे कपड़ों में अर्ध नग्न व्यक्ति उसके सामने खड़ा होता है असल में वो उसके पापा थे ,वो दौड़ कर उनके गले लग जाती है।

व्यक्ति अपनी बीवी को बताता है की किस तरह दुश्मन देश की सेना ने उसे बंदी बना लिया और खूब मारा पिटा। किसी तरह वो जान बचा कर भाग कर यहाँ तक आया है।

वो ये सब बता ही रहा होता है इतने में डाकिया चिट्ठी लेकर आता है , ये वही चिट्टी होती है जो वो अपनी बच्ची को भेजने के लिए पहाड़ के आखिरी पोस्ट ऑफिस में छोड़ता है परन्तु वो अब तक नहीं पहुंची होती है। जैसे ही वो चिट्ठी खोलता है उसकी आंखें नाम हो जाती है। छोटी बच्ची ने भगवान के नाम वो चिट्ठी लिखी होती है।

चिट्ठी की शुरुवात कुछ इस तरह होती है “ भगवान जी मेरे पापा मुझसे दूर जा रहे है , वो हमेशा कहते है की भगवान् से सच्चे दिल से जो माँगा वो मिलता है, मैं चाहती हूँ आप उन्हें जल्दी से मेरे पास भेज दे, आप उन्हें मेरे पास भेजेंगे न”?

इतनी कोमल और मार्मिक दुआ भला भगवन कैसे न सुनता, शायद उस बच्ची की दुआ ही थी जो पकड़े जाने के बाद भी वो आज जिंदा था जबकि उसके अन्य साथी मारे जा चुके थे। 

निष्कर्ष- आस्था एक ऐसा शब्द है जो कठिन से कठिन कार्य को आसान बना देता है। आस्था किसी वस्तु ,ईश्वर, या किसी भी चीज़ में हो सकती है ,अगर वो सच्ची है तो उसे पूरा होने से कोई रोक नहीं सकता फिर चाहे आपके जीवन में कितनी भी मुश्किलें आ जाए।

Hindi moral story: ईश्वर का लीला

एक व्यक्ति अपनी नौकरी से बड़ा परेशान होता है , काम का अत्यधिक दबाव, बॉस की रोज़ रोज की चीक चीक और ऑफिस वालों के ताने से वो तंग आ चूका होता है।

उसे समझ नहीं आता की क्या किया जाए ,नौकरी छोड़ दिया जाए या फिर सबसे लड़ा जाए। इन्हीं उलझनों के बीच रविवार के दिन वो ऑफिस का काम कर रहा होता है इतने में उसकी 5 साल की बेटी हाथों में नोटबुक लिए उसके पास आती है।

वो काम में इतना मशगूल होता है की उसे बेटी के आने की खबर तक नहीं होती। बेटी आकर उससे कहती है “पापा क्या आप मेरा होम वर्क करवा देंगे”? दो तीन बार बोलने के बाद भी वो नहीं सुनता तो उसकी बेटी दुबारा वही बात जोर से बोलती है।

बेटी के तेज आवाज़ में बोलने और काम के दबाव की वजह से वो क्रोधित हो जाता है और उसे डांट कर वहाँ से भगा देता है। वो एक बार देखता तक नहीं की उसकी बेटी आखिर कौन सा काम लेकर आई है ? उसकी बेटी रोती हुई वहाँ से चली जाती है।    

व्यक्ति काम खत्म कर जब सुकून कि सांस लेने बैठता है तब उसे ख्याल आता है उसने क्या कर दिया। उसने तो एक नन्ही सी परी को नाराज़ कर दिया जिसे वो इतना प्यार करता है।

उसे मनाने की खातिर जब वो उसके कमरे में पहुँचता है वो सो चुकी होती है। सोती हुई मुद्रा में नोटबुक उसके सिर के ऊपर रखी हुई होती है। वो सोचता है की क्यों न एक बार देखा जाए की आखिर उसकी बेटी नोटबुक में कौन सा काम लेकर उसके पास आई थी।

जैसे ही वो नोटबुक में लिखे शब्द पढ़ता है उसकी आँखों से झर झर आंसू बहने लगते है। लड़की के स्कूल से काम मिला होता है की ईश्वर का धन्यवाद करने हुए कुछ पंक्तियाँ लिखो।      

उसने कुछ इस तरह से ईश्वर के प्रति अपने शब्द लिखे होते है “ थैंक यू गॉड की आपने रात बनाई , अगर आप रात न बनाते तो मेरे पापा घर कभी न आते और मैं उनसे रोज़ न मिल पाती”। 

थैंक यू गॉड की आपने अलार्म घड़ी बनाई जिसके बजते ही सुबह उठाना सबसे थकाऊँ लगता है पर ये अगर न होती तो मैं कभी अपने स्कूल समय पर न पहुँच पाती”।  

थैंक यू गॉड की आपने गर्मी का मौसम बनाया ,क्योंकि अगर आप ये न बनाते तो मुझे स्कूल से गर्मी की छुट्टियाँ कभी न मिलती और मैं नानी के घर कभी न जा पाती” । और अंत में जो लिखा होता है वो उस व्यक्ति को अन्दर से हिला कर रख देता है “ थैंक यू गॉड की आपने मुझे दुनिया का सबसे अच्छा पापा दिया जो शुरू में तो गुस्सा होते है पर जैसे ही उन्हें एहसास होता है वो मनाने चले आते है, फिर मुझे खूब सारी चोकलेट और आइसक्रीम दिलाते है”।  

व्यक्ति उन कोमल मन से लिखे शब्दों को पढ़कर सन्न रह गया। उसकी बेटी ने भगवान को इतने छोटी छोटी छोटी बातो के लिए धन्यवाद दिया था जिसका किसी के जीवन में कोई मोल नहीं होता।

उसने सोचा मेरे पास तो सबकुछ है, अपना घर है ,बेसक मैं किस्तों में भर रहा हूँ पर घर तो मेरा ही है , मेरा परिवार है, किसी के पास तो खुद का परिवार भी नहीं है, एक बहुत बिजी रखने वाली जॉब है ,काम है तभी तो व्यस्त हूँ अगर न होता तो मैं तो खाली बैठा होता।

उसे एक एक करके सभी चीजों का एहसास हो रहा था। उसने अपनी बेटी को प्यार भरी नजरों से देखा और निर्णय लिया की आज के बाद वो किसी भी कार्य को बोझ समझ कर नहीं करेगा साथ ही उसने ईश्वर को उन सब चीजों के लिए शुक्रिया अदा किया जो  ईश्वर ने उसको दिया था।  

निष्कर्ष– जिंदगी में पूरी उम्र हम कमियों का रोना रोते रहते है की उसके पास ये है मेरे पास ये नहीं , वो इतना बड़ा है मैं इतना छोटा हूँ, वो सभी चीजे जो हमारे पास है हो सकता है कइयों के पास वो भी न हो परन्तु हम कभी उन चीजों के लिए ईश्वर का धन्यवाद नहीं करते और न आभार प्रकट करते है। जिंदगी बेहद खूबसूरत है अगर हम उन चीजों की क़दर करे जो हमारे पास है।

Hindi story with moral: 3 फिट की मौत

संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयार्क में एक विवाहित जोड़ा रहता था। पति पत्नी आपस में हमेशा लड़ते रहते थे। पत्नी अपने पति को छोड़ना चाहती थी क्योंकि पति की आमदनी से उसकी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थी।

रोज़ आये दिन किसी न किसी बात का बहाना बना कर वो अपने पति से लड़ती रहती थी। एक दिन तय आकर दोनों के तलाक लेने का फैसला किया। पति को तलाक के रूप में एक अच्छी खासी रकम चुकानी थी।

पत्नी से तलाक के चलते उस आदमी को अपनी पूरी दौलत पत्नी को सौंपनी पड़ा। पति अपना सब कुछ हार बैठा था ,रुपया पैसा, घर ,पत्नी सब कुछ। उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या किया जाए ,कहा से शुरू किया जाए।

उसकी जेब में मात्र 80 डॉलर बमुश्किल से बचे थे। उसने सोचा बर्बाद तो मैं हो ही चुका हूँ क्यों न इन 80 डॉलर से अपनी जिंदगी की आखिरी ख़ुशी जी ली जाए ,थोड़ा मौज मस्ती कर ली जाए। यही सोच कर वो नजदीक के एक बार में गया।

वो जैसे ही पीने के लिए बैठा ही था उसकी निगाह पास में पड़े एक अख़बार के विज्ञापन पर पड़ी। विज्ञापन में लिखा था की सरकार पास के ही एक सरकारी सोने की खदान की नीलामी करने जा रही है ,इच्छित व्यक्ति नीलामी में भाग ले सकता है।

उसने घड़ी पर नज़र दौड़ाई कुछ ही देर में नीलमी शुरू होने वाली थी। उसने सोचा अगर किस्मत में मौज लिखी होगी तो वो वहाँ से भी खाली हाथ लौट कर आ जाऊंगा क्यों न एक बार चल कर देखा जाए क्या पता उसके हाथ कुछ लग जाए।

इसी सोच के साथ वो नीलामी वाली जगह पर पहुंचा। किस्मत देखिये बोली 80 डॉलर पर आकर रुकी, कीमत के इतने कम होने का कारण उसे तब पता चला जब वो उसका मालिक बन चुका था। 

असल में सरकार उस खदान का दोहन कर चुकी थी ,अब उसमें कुछ बचा न था। व्यक्ति सर पिट कर रह गया। उसके 80 डॉलर जा चुके थे।

वो बैठ कर सोच ही रहा था की इतने में खदान में काम करने वाले मजदूर आये और बोले “ हुजूर क्या करना है ,खुदाई करें या घर जाए हमें आज के खुदाई के पैसे मिल चुके है अगर आप कहे तो हम खुदाई करे क्योंकि आप मालिक है जैसा आप कहेंगे हम करेंगे”।

भारी मन से उस व्यक्ति ने कहा “ठीक है आप लोग खुदाई करें, कुछ न करने से अच्छा है की जो पैसा मिला है उतना काम आप लोग करके जाए”।  मजदूरों ने खुदाई शुरू किया ,खोदते खोदते शाम होने को थी, परन्तु कुछ न निकला।

वो बैठ कर अपने आगे के भविष्य के बारे में सोच ही था की एक मजदूर भागता हुआ आया और बोला “साहब वहाँ कुछ मिला है एक बार चल कर देखे आप”।

आदमी ने जा कर देखा था उसके होश का ठिकाना न रहा, असल में वो सोने का पत्थर था, हाँ विशाल सोने का पत्थर। वो ख़ुशी के मारे चिल्लाने लगा ,उसके आँखों से ख़ुशी के आंसू बह रहे थे, खबर देने वाले मजदूर को उसने गोद में उठा लिया और जोर जोर से चिल्लाने लगा। उसने भगवान का शुक्रिया अदा किया और उस पत्थर को चूम लिया।

उस व्यक्ति की किस्मत बदल चुकी थी ,देखते ही देखते वो बहुत अमीर हो गया ,गाड़ी ,बंगला घर सब कुछ उसने खरीद लिया था। एक वक्त ऐसा भी आया जब वो न्यूयार्क का सबसे अमीर आदमी बन गया।  

निष्कर्ष- अपने हिस्से का परिश्रम करते रहिये ,कब कहाँ ,और कैसे आपकी किस्मत बदल जायेगी आपको भी पता नहीं चलेगा। शास्त्रों में लिखा है कर्म करना हमारे हाथ में है परन्तु फल पर हमारा नियंत्रण नहीं है इसलिए कर्म कीजिये फल तो ऊपर वाला दे ही देगा।

Moral stories for childrens in Hindi: विश्वास का फल

एक बार एक मदारी किसी बाज़ार में अपना खेल दिखा रहा था। उसने दो खम्भों के बीच एक पतली सी रस्सी बाँधी और उसे पार करने के लिए खम्भे पर चढ़ गया। मदारी की गोद में दूध पिता उसका बच्चा भी था।

मदारी की ये एक तरकीब थी जिससे वो लोगों का ध्यान अपनी और खिंच पाए । जैसे ही बच्चे को लेकर वो रस्सी पर चढ़ा लोगों की भीड़ बढ़ने लगी।

सभी इसी कौतूहल में थे की क्या मदारी बच्चे के साथ रस्सी पार कर पायेगा? मदारी धीरे धीरे रस्सी पार कर रहा था। लोगों की भीड़ बढ़ती ही जा रही थी। अब वो रस्सी के बीच में था यानी आधी रस्सी पार कर चुका था।

सभी दर्शक दांतों तले उँगली दबाये खड़े थे की अब क्या होगा? अंततः मदारी ने रस्सी पार कर ली। दर्शकों ने तालियों से मदारी का स्वागत किया। मदारी नीचे उतरा और उसने सभी का शुक्रिया हुए भीड़ से पूछा “किस किस को लगता है की मैं ये दुबारा कर सकता हूँ? पूरी भीड़ ने एक स्वर में ‘हाँ’ बोलते हुए हाथ उठाया।

मदारी ने दुबारा पूछा “एक बार फिर बताइये किस किस को लगता है मैं ये दुबारा कर सकता हूँ” ,सभी ने “हाँ” में हाथ उठाया। मदारी ने भीड़ में से किसी के बच्चे को अपने गोद में उठाया और कहा “अब किस किस  लगता है की मैं ये कर सकता हूँ” सभी ने हाँ कहा सिवाए उसके जिसका बच्चा उसने लिया था।

मदारी ने फिर कहा “मान लीजिये की मेरी गोद में आपका बच्चा होता तो किस किस को लगता की मैं ये कर सकता था” पूरी भीड़ एकदम खामोश रही ,कोई कुछ न बोला, सभी एक दूसरे का मुंह देख रहे थे।

मदारी ने बच्चे को रखते हुए कहा “यही जिंदगी है जब बच्चा मेरा था ,खतरा मुझ पर था आपने यकीन किया की मैं कर लूँगा परन्तु जब बात आप पर आई यानी बच्चा आपका था तो आपको मुझ पर यकीन ही नहीं हुआ की मैं ये कर पाऊँगा”।

हम भी जिंदगी में लोगों के साथ ऐसे ही खेलते है , जब तक हमारी कोई चीज़ दांव पर नहीं लगी होती हम लोगों पर आंख मूंद कर यकीन करते है परन्तु जैसे ही हमारा कोई हित उनके साथ जुड़ता है हम सावधान हो जाते है ,थोड़ी देर पहले जिसपर हमें खुद से ज्यादा यकीन होता है उस पर हम संशय की निगाह से देखने लगते है।  

यदि आपको किसी पर यकीन है या विश्वास है की वो कोई कार्य कर लेगा या सफल हो जाएगा तो उससे क्या फर्क पड़ता है की उसमें आपका हित है या उस व्यक्ति का वो भी तो इंसान है उसके भी तो हित है फिर ये दो मुखौटे क्यों?मदारी की बात सुनकर पूरी भीड़ चुप थी ,उसकी बातों का किसी के पास कोई जवाब नहीं था।

सच है दोस्तों यदि आपका विश्वास और यकीन किसी में है तो उसे हर परिस्थिति में रखे वो यकीन और विश्वास ही क्या जो हालात के साथ बदल जाए। वैसे भी ऐसे इनसान को दुनिया मौकापरस्त कहती है। 

इन्हें भी जरूर पढ़ें:

दोस्तों यह कहानी का अंतिम पल था। Hindi Moral Stories में लिखित यह कहानी सभी जीव जंतुओं की अहमियत को दर्शाता है। यह समाज का सत्य है कि कोई भी व्यक्ति पूर्ण रूप से सही नहीं है अर्थात कुछ न कुछ कमी हर व्यक्ति व जीव में पाई जाती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह व्यक्ति या जीव का जीवन व्यर्थ है। अगर दिमागी शक्ति से सोचा जाए हर व्यक्ति के भीतर कुछ अंदरूनी ताकत मौजूद है। सिर्फ नजर चाहिए उसे तलाशने की। 

उम्मीद है आपको यह Hindi Moral Story पसंद आई होगी। हमसे संपर्क में रहे और Hindi DNA की वेबसाइट पर आते रहें। क्योंकि हम हर दिन इस वेबसाइट पर नई नई कहानी Hindi Moral Stories प्रकाशित करते रहते हैं।

कोई सुझाव अथवा कोई शिकायत हो तो आप हमें मेल भेज सकते हैं नहीं तो सबसे उच्च माध्यम नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। हमें इंतजार रहेगा।

धन्यवाद।

अपनों के साथ जरूर साझा करें:

Share on facebook
Facebook
Share on whatsapp
WhatsApp
Share on twitter
Twitter
Share on telegram
Telegram
Share on pinterest
Pinterest
Share on tumblr
Tumblr
Share on email
Email
Hindi DNA

Hindi DNA

हिन्दी डीएनए आपकी ज्ञान को बढ़ाने के लिए है।

All Posts

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें

Scroll to Top