Panchatantra stories in Hindi – पंचतंत्र की सीख देने वाली कहानियां!

Panchatantra stories in Hindi

नमस्कार दोस्तों!, आप सभी का स्वागत है इस Hindi DNA से भरी हुई कहानियों की महफ़िल में। Panchatantra stories in hindi श्रेणी में हम आपके समक्ष पंचतंत्र की लघु कहानियों का संगम प्रस्तुत करेंगे।

इन Panchatantra stories in hindi श्रेणी में आपको वह हर तरह की कहानी से घुल मिलने का मौका मिलेगा, जिसे कभी मनोरंजन के लिए आप इस्तेमाल लिया करते थे। परन्तु इस बार इन Hindi kahaniya को सीख की दृष्टि से पढ़े।

यह Hindi Story प्राचीन समय में बेहद प्रख्यात थी परन्तु अब इसका अस्तित्व लोग भुला चुके हैं। इन Panchtantra ki Kahani को अन्य भाषाओ में भी अनुवाद किया गया, हालांकि इसका मूल रूप संस्कृत भाषा में था। 

#1 Panchatantra stories in hindi:- हाथी का गुरुर, चींटी ने किया चकनाचूर

शहर के शोर के बीच एक शांत सा वन बसा हुआ था। जिन्हें चंदन वन नाम से पहचान मिली हुई थी। चंदन वन में एक भारी शरीर वाला हाथी रहता था। इसे अपनी ताकत का बेहद गुरुर था।

इसी ताकत को दिखावा करते हुए वह सभी जानवरों को तंग करता था। इसके साथ वह वातावरण को नुकसान पहुंचाता था। जिससे पेड़ पौधे इसके उधम के शिकार होने लगे थे। एक दिवस जब वन में तेज वर्षा का आभास हुआ तो वह दौड़ते हुए पास के एक गुफा में जा छुपा। वहाँ उसे एक चींटी दिखी।

चींटी को देख हाथी ने फ़ॉर से अपना गुरुर करना शुरू लर दिया।

“हा हा हा हा, मैं तुम्हे देखकर हास्य रस में खो रहा हूँ, तुम तो बेहद मामूली हो, मैं तुम्हे अपनी फूक से उड़ा कर फेंक दूंगा”- हाथी ने चींटी से कहा।

चींटी अपना मजाक उड़ते हुए जानने के बावजूद उस हाथी से कुछ न कहा। वन में वर्षा का प्रकोप इतना था कि गुफा के ऊपर रखी चट्टान जो कि मिट्टी के सहारे टिकी हुई थी। वह चट्टान मिट्टी के गीली होने के कारण गुफा के आगे गिर गई।

हाथी ने बेहद कोशिश करी इस चट्टान को हटाने के लिए। परन्तु काफी देर तक कोशिश करने के बाद भी सफलता उससे दूर थी। अब हाथी हार मार चुका था। चींटी ने उसको रोका और कहा मेरे बाहर निकलने की जगह इस गुफा में हैं।

चींटी उस छोटी सी जगह से बाहर निकला और हाथी के बाकी साथियो को संदेश दिया जिससे उन हाथियों ने गुरुर वाले हाथी को बचा लिया।”

हाथी ने अपनी जान बचाने के लिए चींटी का शुक्रिया अदा किया।

शिक्षा:- संसार में जन्मा हर मनुष्य भिन्न है। हर मनुष्य की अपनी भिन्न सोच एवं भिन्न पहचान है। किसी भी व्यक्ति को किसी के आकार पर भेदभाव करना उचित नहीं। 

#2 Panchatantra ki kahani: अज्ञानी ही ज्ञानी है

प्राचीन वक्त के एक ग्रामीण क्षेत्र में चार ब्राह्मण एक साथ रहते थे। इन चारों ब्राह्मणों में तीन ब्राह्मणों के पास समूचे विश्व का भरपूर ज्ञान मौजूद था, परन्तु चौथा ब्राह्मण को वे सब अज्ञानी मानते थे क्योंकि उसे किसी विद्या वेद का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं था।

एक दिन भरी सुबह में तीनों ब्राह्मणों ने विचार किया कि वह शहर में धन कमाने के लिए जाएंगे अपनी शिक्षा का प्रदर्शन करेंगे। यह बात सुनकर चौथा ब्राह्मण भी उनके साथ जाने को इच्छा प्रकट करता है।

परन्तु वे तीनों उसे अज्ञानी कहकर मना कर देते हैं। कहते हैं कि “तेरे को तो कुछ आता नहीं तू वहां कौन सी शिक्षा कला का प्रदर्शन करेगा?”

“मैं शहर में तुम्हारे हर कार्य मे सहयोग करा करूंगा” – चौथा ब्राह्मण

यह बात सुनकर तीनों ब्राह्मणो में लालच ने जन्म लिया और उनके साथ चलने की अनुमति दे दी।

सभी ब्राह्मण अपने मार्ग पर चल रहे थे कि अचानक से उनके राह में उन्हें कुछ हड्डियां मिली। जिसे देखकर वह चारों अचंभित रह गए। चारों ने सोचा यह हड्डियां आखिर किस जानवर की है! उनमें से एक ब्राह्मण ने कहा चलो अपने ज्ञान का प्रदर्शन करते हैं इससे यह भी ज्ञात हो जाएगा कि कौन ज्यादा ज्ञानी है।

यह कहने के बाद तुरंत उस ब्राह्मण ने मंत्र जपे  और हड्डियों ने स्वयं एक शेर का आकार ले लिया। दूसरे ब्राह्मण ने कुछ मंत्र पढ़कर उसमें जिस्म डाल दिया।

जैसे ही तीसरा ब्राह्मण मंत्र पढ़कर उस शेर में जान डालने का प्रयास कर रहा था तब उसे चौथे ब्राह्मण ने रोका, परन्तु तीनों ब्राह्मण ने उसे अज्ञानी कहकर उसे गुस्सा करते हुए उसकी बात मानने से इनकार कर दिया।

फिर से तीसरा ब्राह्मण मंत्र उच्चारण करने लगा, मंत्र पूर्ण होता उससे पहले ही चौथा ब्राह्मण वृक्ष की बडी टहनी पर चढ़ गया। शेर में प्राण आते ही वह तीनों ज्ञानी ब्राह्मणों को खा गया और जंगल की ओर चला गया।

सीख:- ज्ञान होना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है परन्तु मात्र किताबी ज्ञान व्यक्ति को मंदबुद्धि से भी कमजोर बना देता है। हर व्यक्ति को प्रैक्टिकल ज्ञान भी अवश्य होना चाहिए।

#3 Panchatantra stories in hindi :- तीन कार्य

एक बार दो असहाय मित्र किसी नगर के सेठ के पास कार्य मांगने की कामना लिए जाते हैं। वह सेठ तुरंत उन्हे काम पर रख लेता है, क्योंकि उसे उस वक्त कर्मचारियों की बेहद आवश्यकता होती है।

परन्तु सेठ का स्वभाव के तौर पर काफी कंजूस होता है अपनी कंजूसी के कारण उसके यहां कोई भी ज्यादा समय के लिए काम नहीं करता है।

उन दोनों मित्रो को वह काम पर रख लेता है और पूरे साल काम करने पर साल के अंत में दोनों को 12-12 स्वर्ण मुद्राएँ देने का वायदा देता है। सेठ यह भी शर्त रखता है कि अगर उन्होंने काम ठीक से नहीं किया या किसी आदेश का उलंघन किया तो उस एक गलती के बदले 4 सुवर्ण मुद्रायेँ तनख्वाह से काट ली जाएगी।

दोनों दोस्त सेठ की शर्त मान जाते हैं और पूरे साल जी-तोड़ परिश्रम करते हैं और सेठ के हर एक आदेश का आदर्शपूर्ण पालन करते हैं। जब काम करते-करते एक साल पूरा होने को आता है तो दोनों सेठ के पास 12-12 स्वर्ण मुद्राएँ मांगने पहुँचते हैं।

मुद्राएँ मांगने पर सेठ बोलता हैं, “अभी साल का आखरी दिन पूर्ण नहीं हुआ है और मुझे तुम दोनों से आज ही तीन और कार्य करवाने की इच्छा हैं।”

पहला कार्य- छोटी सुराही में बड़ी सुराही डाल कर दिखाओ।

दूसरा – दूकान में पड़े गीले अनाज को बिना बाहर निकाले सुखाओ।

तीसरा- मेरे सर का सही-सही वजन बताओ।

“यह तो मुश्किल प्रतीत होता है!”, दोनों मित्र एक स्वर में बोल पड़ते हैं।

“ठीक है तो फिर यहाँ से चले जाओ…इन तीन कामों को ना कर पाने के कारण मैं हर एक काम के लिए 4 स्वर्ण मुद्राएँ काट रहा हूँ…”

मक्कार सेठ की इस धोखाधड़ी से उदास हो कर दोनों दोस्त नगर से जाने लगते हैं। उन्हें ऐसे जाता देख एक चतुर पण्डित उन्हे अपने पास बुलाता है और पूरी बात समझने के बाद उन्हें वापस सेठ पास भेजता है।

सेठ के पास पहुँच दोनों मित्र बोलते हैं, “सेठ जी अभी आधा दिन बाकी है, हम आपके तीनो काम किये देते हैं।” और तीनो दूकान के अन्दर घुस बड़ी सुराही को तोड़-तोड़ कर छोटी के अन्दर डाल देते हैं। सेठ मन मसोस कर रह जाता है पर कुछ कर नहीं पाता है। इसके बाद दोनों गीले अनाज को दूकान के अन्दर फैला देते हैं।

“अरे, फैलाने भर से भला ये कैसे सूखेगा…इसके लिए तो धूप और हवा चाहिए…”, सेठ मुस्कुराते हुए कहता है।

“देखते जाइए…”, ऐसा कहते हुए दोनों मित्र हथौड़ा उठा आगे बढ़ जाते हैं।

इसके बाद दोनों मिलकर दूकान की दीवार और छत तोड़ डालते हैं….जिससे वहां हवा और धूप दोनों आने लगती है।

मित्रों को सेठ और उसके आदमी देखते रह जाते हैं…किसी की भी उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं होती।

“अब आखिरी काम बचा होता है…”, दोनों मित्र तलवार ले कर सेठ के सामने खड़े हो जाते है और कहते हैं, “मालिक आप के सिर का सही सही वज़न तौलने के लिए इसे धड़ से अलग करना होगा। कृपया बिना हिले स्थिर खड़े रहें।”

अब सेठ को समझ आ जाता है कि वह गरीबों का हक इस तरह से नहीं मार सकता और बिना कोई और नाटक किये वह उन दोनों को 12 – 12 स्वर्ण मुद्रायेँ सौप देता है ।

सीख:- किसी भी व्यक्ति का हक कभी नहीं मारना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:

उम्मीद है आपको यह Panchtantra ki Kahaniya पढ़कर अपने शिशु जीवन की सैर फिर करी होगी। ऐसे ही Panchatantra stories in hindi को पढ़ने के लिए हमारे साथ संपर्क रखें।

धन्यवाद।

अपनों के साथ जरूर साझा करें:

Share on facebook
Facebook
Share on whatsapp
WhatsApp
Share on twitter
Twitter
Share on telegram
Telegram
Share on pinterest
Pinterest
Share on tumblr
Tumblr
Share on email
Email

नवीनतम पोस्ट:

फॉलो जरूर करें:

श्रेणी चुने:

.
Hindi DNA

Hindi DNA

हिन्दी डीएनए आपकी ज्ञान को बढ़ाने के लिए है।

All Posts

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नवीनतम पोस्ट:

श्रेणी चुने:

.

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें