Top 10 Moral Stories In Hindi – हिन्दी मे कहानियाँ!

Top 10 Moral Stories In Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज मैं इस लेख मे Top 10 Moral Stories In Hindi से 10 बेहतरीन सिख देने वाली कहानियाँ साझा करने जा रहा हूँ जिन्हे आप पढ़ के काफी आनंदित महसूस करेंगे।

Top 10 Moral Stories In Hindi – जहाँ चाह वहाँ राह

मेलेनी मूरे जो की एक अमेरिकी महिला थी बचपन से ही उसे नृत्य का बढ़ा शौक था। बिना कुछ खाए पिए वो घंटों नृत्य का अभ्यास करती रहती जिसे देख उसके माता पिता अचंभित तो होते ही साथ में चिंतित भी रहते।

मेलेंनी का डांस के प्रति इतनी अभिरुचि ने उसके माता पिता को मजबूर कर दिया की वो किसी अच्छे डांस टीचर से उसकी ट्रेनिंग करवाए। उसके माता पिता उसे एक बैलट डांसर बनाने चाहते थे।

उन्ही दिनों बैलट डांसर का एक ग्रुप उसी शहर में आया हुआ था। मेलेनी को उसके पिता उसी ग्रुप के डांस टीचर के पास ले गए और उससे निवेदन किया की वो मेलेनी को डांस के लिए ट्रेन करे।

डांस टीचर जो की अपने ही काम में मशगूल था मान गया। उसने मेलेनी को डांस करके दिखाने के लिए कहा परन्तु खुद काम में व्यस्त रहा। मेलेनी डांस किये जा रही थी पर वो ध्यान नहीं दे रहा था ,बीच बीच में देखता और फिर अपने ही काम में लग जाता।

मेलेनी ने जब डांस पूरा किया तो डांस टीचर ने कहा “तुम एक अच्छी डांसर नहीं बन सकती ,सच कहूँ तो तुम डांसर बनने का सपना छोड़ दो, तुम्हारें अन्दर वो काबिलीयत नहीं जो तुम्हें अच्छा डांसर बना सके”।

इतना कह कर वो चला गया। एक प्रसिद्ध डांसर गुरु के मुख से इस तरह की बाते सुन कर मेलेनी टूट गयी और रोने लगी। उन्होंने डांसर बनाने का सपना छोड़ दिया और टीचर की एक मामूली सी नौकरी करने लगी।

नौकरी करते हुए 5 वर्ष बीत गए थे। एक दिन उनके स्कूल में डांस का टीचर नहीं आया था। उसने मेलेनी को अपने आने तक बच्चो को सँभालने के लिए कहा।

मेलेनी ने बच्चों को बहुत अच्छा डांस करके दिखाया ,वो उन्हें बहुत सही तरीके से डांस सीखा ही रही थी की इतने में डांस का टीचर आ गया। जब उसने मेलेनी को इतना अच्छा डांस करते हुए देखा तो अभिभूत हो गया।

उसने मेलेनी को उसकी डांस कला से अवगत कराया और उसकी खूब तारीफ़ की। उसके बाद जो हुआ वो सारी दुनिया जानती है। मेलेनी दुनिया की सबसे बेहतरीन डांस टीचर के साथ साथ बहुत बड़ी बैलट डांसर बनी।

उनके सिखाये हुए बच्चे आज भी हॉलीवुड ,टीवी, सिनेमा और डांस के विभिन्न मंचों पर नाम कमा रहे है।  

निष्कर्ष- मेलेनी को दो गुरु मिले एक ने उसे जरा भी तरजीह नहीं दी ,उसके कला का क़द्र नहीं किया और तो और उसे डांस छोड़ देने के लिए हत्तोसाहित किया तो दूसरे ने उसका उत्साह वर्धन किया, उसे बताया की वो कितनी निपूर्ण है। अगर पहला गुरु उसका सही से मूल्यांकन करता तो मेलेनी के 5 साल ख़राब न होते।

हम सभी की जिंदगी में ऐसे लोग होते है जो हमारे जीवन और हमारे सपनों को बनाने या तोड़ने का कार्य करते है। ऐसे लोगों से बच कर रहे जो ये कहते है ‘तुमसे नहीं होगा’ ‘तुम नहीं कर सकते या सकती’। ये सपने आपके अपने होते है, आप अपनी क्षमता से  भलीभांति वाकिफ होते है तो किसी के कहने से हमें अपने सपने को सजाने या उसे छोड़ देना का निर्णय कभी नहीं लेना चाहिए।

Top 10 Moral Stories In Hindiईश्वर बचा लेगा

एक बार एक गाँव में बाढ़ आ गई। लोग सुरक्षा के लिए अपनी अपनी छतों पर खड़े हो गए। एक आदमी लगातार भगवान से प्रार्थना कर रहा था। वह अत्यंत धार्मिक था परन्तु मनुष्य से ज्यादा ईश्वर में यकीन रखता था।

जल स्तर लगातार बढ़ रहा था। एक नाव के साथ कुछ व्यक्ति उसे बचाने के लिए आये ,उसे नाव पर चढ़ जाने के लिए कहा परन्तु उसने इनकार कर दिया। उसने कहा, “नहीं, मैं अपने भगवान से बच जाऊंगा।”

नाव छोड़ दीजिये। थोड़ी देर बाद एक और नाव आई नाव में बैठे लोगों ने उसे नाव में बैठाने  की पूरी कोशिश की फिर भी वो न बैठा। उसने इस बार भी उन्हें न में जवाब दिया । जल स्तर आखिरकार छतों तक चला गया।

फिर एक हेलिकॉप्टर आया, और एक रस्सी उसके पास फेंकी गई जो हेलिकॉप्टर में उसे चढ़ने के लिए फेंकी गई थी परन्तु उसने फिर से वही जवाब दिया। थोड़ी ही देर बाद आदमी पानी में अपनी गर्दन तक आ गया और आखिरकार डूब कर मर गया। 

जब वो स्वर्ग में पहुंचा  तो उसका क्रोध फूट गया और क्रोध से फूटते हुए भगवान से पूछा कि वह उसे बचाने क्यों नहीं आए जबकि वो उनका एक सच्चा भक्त था।

भगवान ने उत्तर दिया, ” निर्बुद्धि इंसान वो नाव और हेलीकाप्टर का बचाव दल सब मेरी ही कृपा थी ,सभी को मैंने ही वहाँ पहुँचाया था जो तेरी मदद के लिए गए थे” पर तू ठहरा मुरख इंसान तूने सभी को न कह दिया ।

लेकिन यह तू  ही था जो  खुद को बचाना नहीं चाहता था। अब तू बता मैं इस बारे में क्या कहूँ  या करूँ? मैंने तुझे तीन विकल्प दिए, लेकिन तूने उन्हें खुद ही अस्वीकार कर दिया। ”   

निष्कर्ष- इस दुनिया में जब हमें  कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है, हम उस समय भगवान से प्रार्थना करते हैं, लेकिन हमें साथ साथ कड़ी मेहनत भी जारी रखना होता है हम ये भूल जाते है। जो लोग अपने दुर्भाग्य के लिए अपनी किस्मत को दोष देते हैं या इसे भगवान पर छोड़ देते हैं। वे हमेशा के लिए वहीं रहते है जो वो पहले थे, क्योंकि भगवान भी उन्हीं लोगों से प्यार करता है और उन्हीं का साथ देता हैं जो वक़्त गवाए अपनी कोशिशों के सहारे अपनी मंजिल को पाते को पा लेते।  

Top 10 Moral Stories In Hindi – भविष्य की चिंता

एक बार एक बहुत ही प्रसिद्ध जादूगर होता है। नए नए जादू दिखाना और लोगों को खुश करना उसका पेशा होता है। जिस नगर में वो रहता वहाँ का राजा घोषणा करता है की जो जादूगर उसे कोई नया जादू दिखायेगा उसे वो बहुत सारी सोने की मोहरें देगा।

जादूगर सोचता है “यही तो वो चीज़ थी जिसकी उसे तलाश थी”। उसने सोचा की वो राजा को एकदम नया जादू दिखायेगा और उन्हें प्रसन्न कर देगा। उसे जादू दिखाने के लिए राजा के दरबार में बुलाया गया।

बड़े उत्साह के साथ वो दरबार में पहुँचता है। जादूगर जादू दिखाना शुरू ही करता है की उससे एक गलती हो जाती है ,उसके जादू की वजह से राजा का मुकुट उनके सिर से गायब हो जाता है।

दरबार में बैठे सभी लोग हंसने लगते है। राजा का मज़ाक बन जाता है। राजा बहुत लज्जित महसूस करता है। वो जादूगर को उसकी गलती के लिए मृत्यु दण्ड देता है। जादूगर को ठीक सात दिन बाद फांसी पर लटकाने का फरमान देता है।

जादूगर की बीवी जब ये सुनती है तो भागे भागे उससे मिलने आती है। जब वो उसे मिलने पहुँचती है तो वो मुसकुरा रहा होता है। उसे मुसकुराता देख उसकी बीवी को बड़ा गुस्सा आता है वो उससे कहती है  “सात दिन बाद मरने वाले हो फिर भी तुम्हारे चेहरे पर चिंता की जरा सी लकीर नहीं है, कैसे आदमी हो तुम”।

जादूगर कहता है “अभी सात दिन है ,तुम चिंता न करो सब ठीक होगा”। बीवी वहाँ से उदास होकर चली जाती है। पहला दिन गुजरता है ,फिर दूसरा ऐसे करते करते 6 दिन गुजर जाते है।

बीवी बोलती है देखा कुछ हुआ क्या? तुम कल इस दुनिया में नहीं रहोगे मेरा क्या होगा?, हमारे बच्चे का क्या होगा? जादूगर फिर वही दोहराता है “अभी मरा नहीं हूँ एक दिन है अभी मेरे पास”।

बीवी रोते हुए वहाँ से चलती जाती है। 7वा दिन आ जाता है ,राजा सोचता है चलो एक बार चलकर आखिरी बार जादूगर से मिल लिया जाए। राजा अपने घोड़े पर बैठ कर उससे मिलने पहुँचता है।

जैसे ही जादूगर राजा को आते हुए देखता है उसे एक तरकीब सूझती है ,वो पीछे मुड़ कर खुद से बाते करने लगता है ,”कितनी मुश्किल से मैंने घोड़े को उड़ाने के जादू की खोज शुरू की थी अभी कुछ ही दिन बच्चे थे की मेरा घोड़ा उड़ने लगता ,उफ़ मैंने क्या कर लिया ,मेरी सारी विद्या बेकार चली जायेगी मेरे साथ”।

राजा उसकी बात सुन लेता है और सोचता है की अगर मुझे उड़ने वाला घोड़ा मिल जाए तो मैं तो कई सारे युद्ध यूँ ही जीत लूँगा।

राजा जादूगर से बोलता है “जादूगर सुनो मुझे वो तुम्हारा जादू चाहिए जो घोड़े को उड़ा सकता है, मैं तुम्हें एक साल का वक़्त देता हूँ तुम अपनी खोज पूरी करो और मुझे वो जादू लाकर दो, अगर तुम सफल हो गए तो मैं तुम्हें माफ़ कर दूंगा” इतना कहकर राजा जादूगर को छोड़ देता है।

जादूगर के घर पर सभी एकत्रित हुए होते है, घर पर उसके मरने का मातम चल रहा होता है। जैसे ही जादूगर की बीवी अपने पति को देखती है खुश हो जाती है साथ में हैरान भी होती है।

जादूगर उसे सारी बात बताता है। पत्नी कहती है “ तुम्हारा दिमाग ख़राब है ,तुमने ये क्या कह दिया कहाँ से दोगे तुम उसे उड़ने वाला घोड़ा, हमारे पास तो ऐसा कोई घोड़ा है नहीं, अगर तुमने उसे नहीं दिया तो वो फिर तुम्हें फांसी पर लटका देगा”। जादूगर उसे समझाता है और कहता है की ईश्वर सब ठीक कर देंगे।

जिसका समाधान हमारे पास है ही नहीं उसके लिए क्यों परेशान होना। भगवान ही इसका समाधान करेंगे। अब हम एक साल तक हंसी ख़ुशी जी सकते है। पत्नी को उसकी बाते बेतुकी लगती है पर वो चुप हो जाती है।     

इस बात को 6 महीने ही गुजरे होते है की राजा की अचानक मृत्यु हो जाती है। उसके मरने के कुछ दिन बाद ही उसका भी घोड़ा मर जाता है। जैसे ही ये खबर जादूगर को मिलती है वो ख़ुशी से झूम उठता है और पत्नी से कहता है “देखा मैंने कहा था की न की ईश्वर सब ठीक कर देगा ,राजा जी तो चल बसे साथ में वो घोड़ा भी स्वर्ग सिधार गया”।

अब हमें किसी को कुछ देने की जरूरत नहीं है। अगर मैंने तुम्हारी बात मानी होती और अपनी साल भर बाद होने वाली मृत्यु को लेकर दुखी रहता तो शायद हमारे ये 6 महीने हंसी ख़ुशी से कैसे बीतते।

जो चीज़ कल होने वाली है उसको आज पर हावी करके अपना आज ख़राब मत करो। जिंदगी बहुत छोटी है उसे आज में जियों कल में नहीं। जिस चीज़ पर तुम्हारा कोई जोर ही नहीं उसकी चिंता करके कोई फ़ायदा नहीं।

Moral stories in hindi – 4 मिनट- मील रेस

टेक्सास का रग्बी स्टेडियम, इंग्लैंड के Patriots और US Falcons के बीच सुपर बाउल का रोमांचक मैच चल रहा था। एक तरफ थे Patriots जो बेहद ही कमजोर  और अनुभव हीन थे तो दूसरी तरफ थे US के  falcon, बेहद तेज तर्रार और पूरी तैयारी के साथ आई हुई टीम।

स्टेडियम दर्शकों से भरा पड़ा था। इंग्लैंड और अमेरिका के बीच रग्बी का मैच हर किसी के लिए रोमांचक होता था यही वजह थी की दर्शक दीर्घा में बैठा हर व्यक्ति उत्साहित था परन्तु सबसे बुरी खबर ये थी की इस बार इंग्लैंड की टीम ,Patriots बेहद कमजोर नज़र आ रही थी।

बहरहाल मैच शुरू होता है। US falcon अपने अनुभव और उत्साह के दम पर शुरू से ही patriots पर दबाव बनाए हुए रहती है । पहले हाँफ में falcon और Patriots दोनों बराबर पर रहते है ।       

दूसरा हाँफ शुरू होता है और ये क्या दूसरे हाँफ में patriots और falcon के बीच तीन इतना अंतर आ जाता है की पूरा स्टेडियम falcons को विजेता मान कर चलता है। falcons का जितना बस अब औपचारिकता भर रह जाता है।

दूसरे हाँफ में Patriots के 3 तो falcons के 21 गोल पॉइंट होते है। patriots के खिलाड़ियों में घोर निराशा घर कर चुकी होती है। वो भी मान चुके होते है की अब वो खेल में कही बचे ही नहीं है, उन्हें तो बस अब हारने के लिए ही खेलना है।

तीसरे हाँफ में falcons अपना बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखते हुए 7 गोल पॉइंट्स बटोरती है ,वही patriots 3 गोल पॉइंट्स। अब patriots 6 पर तो falcons 28 पर पहुँच जाती है। इसी बीच10 मिनट का ब्रेक टाइम होता है।

patriots के कोच सभी खिलाड़ियों को अपने पास बुलाते है और कहते है “ तुम लोग अच्छा कर रहे हो , यकीनन उम्मीद से भी अच्छा पर क्या तुम्हें पता है ये मैच हम जीत सकते है”।

सभी खिलाड़ी कोच को संशय भरी नज़रों से देखने लगते है। उन्हें लगता है की कोच कही पागल तो नहीं हो गए? कोच ने आगे कहा “आज जो मैं तुम्हें बताने जा रहा हूँ इससे पहले न तो तुमने कभी सुना होगा और न देखा होगा”।

कोच ने सभी खिलाड़ियों को 4 मिनट-मील थ्योरी के बारे में बताया। कोच ने कहाँ “1954 से पहले 4 मिनट में 1 मिल दौड़ना नामुमकिन था, बड़े बड़े न्यूरोलॉजिस्ट ये मानते थे की अगर किसी ने ऐसा करने की कोशिश भी की तो उसकी नसें फट जाएगी और उसका दिल काम करना बंद कर देगा यही वजह है की कोई आज तक 4 मिनट में 1 मिल नहीं दौड़ पाया। सभी कोच की बात को बड़े ध्यान से सुन रहे होते है।       

उसके बाद जो बात कोच ने कही वो वाकई  हैरान करने वाली थी। उन्होंने कहा “1954 में आखिरकार वो दिन आ ही गया जब एक व्यक्ति जिसका नाम रॉजर Banniester था उसने 3 मिनट 59 सेकंड में 1 मिल की दौड़ को पूरा कर साइंस को गलत साबित कर दिया।

उसने ये साबित कर दिया की इच्छा शक्ति के आगे साइंस भी फेल है। कुछ भी असंभव नहीं है अगर आपके अन्दर उसे  संभव करने की क्षमता है। आज कोई भी 4 मिनट में 1 मिल की दौड़ बड़ी आसानी से पूरी कर लेता है।

जानते हो अगर रॉजर बेनिस्टर ने ये करके न दिखाता होता तो आज भी वो चीज़ असंभव लगती। कोच की बात को सुनते ही सारे खिलाड़ी जोश में आ जाते है ,उनके अन्दर एक अजीब सा आत्मा-विश्वास आ जाता है ।

सभी ने निर्णय लेते है  की अब वो वो करके दिखायेंगे जो पहले कभी नहीं हुआ। दोस्तों उसके बाद जो हुआ वो आज भी इतिहास में दर्ज है। patriots ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वो मैच 34-28 के अंतर से जीत लिया।

उनके पास सिर्फ 15 मिनट थे की वो खुद को साबित कर पाए और उन्होंने कर दिखाया। जिस तरह रॉजर बेनिस्टर ने 1954 में पहली बार असंभव सी दिखने वाली चीज़ को संभव कर दिया ठीक उसी प्रकार patriots ने 2017 में अपनी हार को जीत में बदल दिया।   

कोई भी चीज़ दुनिया में असंभव नहीं है अगर आपके अन्दर उसे पाने की इच्छा है। ऐसा नहीं हो सकता की जो कभी नहीं हुआ वो आगे भी नही होगा ,लोग आते है और उदाहरण बनते और फिर उसे सभी फॉलो करते है। 

Hindi moral stories – 2 गज जमीन

सिकंदर की तमन्ना पूरी  दुनिया जीतने की थी ,यही लालसा लिए वो साल दर साल मध्य पूर्व से होते हुए दक्षिण एशिया तक आक्रमण करते हुए पहुंचा।

वो जिस राज्य के साथ युद्ध करता उसे जीत अपने आधिपत्य में मिला लेता। उसकी विश्व विजेता बनने की महत्वाकांक्षा ने न जाने कितने बेकसूर लोगों के प्राण लिए थे, कितनी पत्नियों को विधवा बनाया था और न जाने कितने बेटों को आनाथ किया था।

राज्य विस्तार हेतु वो अब भारत पर आक्रमण करने वाला था। वो अपनी योजनाओं को लेकर बहुत उत्साहित था। उसने बहुत  सारी योजनायें बनाई थी की भारत विजय के साथ उसकी युद्ध की यात्रा खत्म हो जायेगी वो बड़ा सा आलीशान महल बनाएगा, वो ये करेगा, वो वो करेगा हजारों चीज़ें उसके मन मस्तिष्क में चल रही थी।

संध्या ढलने वाली थी अगले दिन उसे भारत पर आक्रमण करना था। उसने सोचा क्यों न गुरु के पास चलकर उनका आशीर्वाद लिया जाए। सिकंदर हर युद्ध से पहले अपने गुरु से राय मशवरा जरूर करता था।

उसने गुरु के पास पहुंचकर उन्हें दंडवत प्रणाम किया। कल के युद्ध के बारे में उन्हें बताया, भविष्य की योजनाओं से उन्हें अवगत कराया। गुरु ने उसे सदा विजयी भव का आशीर्वाद दिया। गुरु को सिकंदर के चेहरे पर एक निरंकुश शासक और अति उत्साहित बालक की छवि महसूस हो रही थी।

गुरु ने सिकंदर से कहाँ “कल तुम विश्व विजेता बन जाओगे, तुम्हारी जय जय कार होगी ,चारों तरफ तुम्हारी यश और कीर्ति का गान होगा पर क्या तुमने सोचा है की तुम रहोगे कहा? किस जगह को अपने रहने का वास स्थान बनाओगे? सिकंदर गुरु की बात सुनकर संशय की अवस्था में आ गया।

वास्तव में उसने अब तक नहीं सोचा था की अपना वास स्थान वो किस देश को बनाएगा? उसके पास हजारों विकल्प थे परन्तु उसने अब  तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया था।

गुरु ने आगे कहा “ सिकंदर जाओ और कल तक आराम से सोचो की तुम्हें रहना कहाँ है ,किस जगह पर तुम अपना आलीशान महल बनवाना चाहते हो? गुरु उसके मन में संशय डाल चुके थे अब बस उससे उसका जवाब चाहते थे।         

गुरु का प्रश्न लिए सिकंदर रण- क्षेत्र में बने शयन कक्ष में चला गया। उसे गुरु द्वारा पूछा गया प्रश्न सोने नहीं दे रहा था। रात भर उसने खुद से सवाल जवाब किया पर किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाया? उसने दुनिया के अधिकतर देशों को जीत लिए था, हर देश की अपनी विशेषता थी ,अपना रहन सहन था ,अपनी खासियत थी फिर भला वो किस बुनियाद पर निर्णय लेता। इसी ऊहापोह में सुबह हो गई।

प्रातःकालीन ही वो गुरु के पास अपनी बेचैन अवस्था लिए पहुंचा। गुरु ने जब सिकंदर को देखा तो वो समझ गए की सिकंदर रात भर सो नहीं पाया है और बेचैन है।

सिकंदर गुरु के चरणों में गिर गया और दोनों हाथ जोड़ते हुए बोला “ हे गुरु देव माफ़ी चाहता हूँ पर मैं अब तक निर्णय नहीं कर पाया हूँ की मुझे कहाँ रहना चाहिए? कल से इस प्रश्न ने मुझे बेचैन करके रखा है ,मेरा सिर दर्द से फटा जा रहा है ,आँखों में नींद है पर नींद नहीं आ रही, कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।        

गुरु मुसकुराते हुए बोले “ सिकंदर तुम्हारी अवस्था एक हठी बालक की तरह है ,तुम दुनिया जितना चाहते हो ,हर तरफ अपनी हुकूमत चाहते हो परन्तु तुम ये तक निर्णय नहीं कर पाए की आखिर तुम्हें रहना कहाँ है? जानते हो क्यों  क्योंकि तुम हर जगह नहीं रह सकते।

तुम्हें रहने के लिए पूरा संसार नहीं बल्कि 4 गज जमीं चाहिए हाँ सत्य है सिर्फ 4 गज जमी चाहिए ,फिर सिर्फ 4 गज जमीं के लिए इतनी मारा मारी, इतने कत्ल, इतनी हत्याएँ क्यों सिकंदर क्यों ? आखिर क्या चाहिए तुम्हें ?,तुम अपने लिए एक घर तक नहीं तलाश पाए फिर ये अर्थहीन युद्ध क्यों?

गुरु के एक एक शब्द सिकंदर को किसी तीर की तरह लग रहे थे , सच्चाई का वो तीर जिससे उसका सामना कभी नहीं हुआ था, उसने गहराई में जा कर सोचा की गुरु सच ही तो कह रहे है, मुझे तो सिर्फ 4 गज जमीन ही तो चाहिए रहने के लिए फिर मैं ये गैर जरूरी हठ क्यूँ कर बैठा हूँ? मैं अपनी मुट्ठी में पूरा संसार तो नहीं समेट सकता या एक वक़्त में 4 जगह तो नहीं हो सकता।

गुरु सिकंदर के पैरो में गिर कर रोने लगा और उसने गुरु से वादा किया की वो कभी युद्ध नहीं करेगा, उसने जिसका जो लिया है उसे वो लौटा देगा। वो कभी हथियार नहीं उठाएगा।   

Top 10 Moral Stories In Hindi – क्रोध का दान

ये कहानी उस समय की है जब विश्व विजेता सिकंदर भारत पर आक्रमण करने वाला था। इतिहास की किताबों में सिकंदर को विश्व विजेता दिखाया गया है परन्तु हकीकत ये है की सिकंदर विश्व के केवल 15 प्रतिशत भू-भाग पर ही कब्ज़ा कर पाया था।

भारत पर आक्रमण करने से पहले सिकंदर की सेना बहुत थक चुकी थी। सिकंदर जीत का इतना भूखा और सनकी था की उसे सेना के किसी सिपाही के दुःख दर्द की जरा भी परवाह न थी, परन्तु इस बार स्थितियाँ भिन्न थी।

थकी हुई सेना के साथ सिन्धु नदी का लम्बा चौड़ा पाट पार कर पाना सिकंदर के लिए आसान न था। उसने वापस लौटने का निर्णय लिया। उस भारत अपनी बौद्धिक क्षमता और ज्ञान के लिए प्रसिद्ध था।

उसने सोचा क्यों न जाते वक़्त किसी ज्ञानी आदमी को यहाँ से अपने साथ ले जाऊँ। बहुत पता करने पर उसे एक ऋषि का पता चला जो घने जंगल में तपस्या कर रहे थे। सिकंदर जब उनके पास पहुंचा वो ध्यान मग्न थे।

अपनी तपस्या पूरी कर जब साधु  कुटिया से बाहर आया सिकंदर की सेना नारे लगाने लगी “ महान सिकंदर की जय हो ,महान सिकंदर की जय हो”। ऋषि रूपी साधु हैरान थे की ये क्या हो रहा है कौन है ये मनुष्य? उन्होंने उसके आने का कारण पूछा।

सिकंदर ने कहा “हे गुरु मैं विश्व विजेता सिकंदर हूँ पूरी दुनिया जीत कर यहाँ तक आया हूँ पर अब मेरी सेना थक चुकी है और मैं भी, इसलिए मैं वापस अपने देश लौट रहा हूँ। मेरी बड़ी इच्छा थी की कोई ज्ञानी मनुष्य मेरे साथ यहाँ से चले, मैं चाहता हूँ आप मेरे साथ चले”।   

गुरु ने सिकंदर की बात सुनते ही उसके साथ जाने से इनकार कर दिया और प्रतिउत्तर में कहा “हे महान सिकंदर मैं अपनी कुटिया और ईश्वर की भक्ति से यहाँ खुश हूँ मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकता”।

सिकंदर को न सुनने की आदत नहीं थी ,उसने फिर गुरु से आग्रह किया की गुरु मेरे साथ चले, वो साधु न माना। बार बार वो निवेदन करता और बार बार वो साधु मना कर देता।

सिकंदर को क्रोध आ गया उसने म्यान से तलवार निकाल ली और कहा “मेरे अधिपत्य को बड़े बड़े राजा नहीं इनकार कर पाए ,मैं महान सिकंदर हूँ ये बात आप कैसे भूल गए, आपको चलना ही होगा मेरे साथ”।

गुरु मुस्कुराए और बोले “किसने कहा तुम महान हो? तुम तो मेरे गुलाम के भी गुलाम हो, फिर भला तुम विश्व विजेता कैसे हुए”?  ‘गुलाम के भी गुलाम हो’ ये शब्द सुनकर सिकंदर को बड़ी हैरानी हुई, उसने पूछा “मैं कैसे गुलाम का गुलाम हो सकता हूँ ,मैं कुछ समझा नहीं”?

गुरु ने कहाँ “ मैं अपने गुस्से पर काबू कर सकता हूँ, मैं जब चाहूँगा वो तभी आएगा परन्तु तुम्हारे साथ ऐसा नहीं है, तुम अपने क्रोध के गुलाम हो, क्रोध तुम पर कभी भी हुकूमत जमा सकता है ,तुम पर नियंत्रण कर सकता है, तुम्हें अपने वश में करके तुमसे कुछ भी करवा सकता है परन्तु मेरे साथ ऐसा नहीं है”।

क्रोध मेरी मर्जी से आता है और मेरी ही मर्ज़ी से जाता है इसलिए वो मेरा गुलाम है और तुम उसके। सिकंदर को समझते देर न लगी की साधु उसे क्या समझाना चाहता है। वो चुप चाप उस साधु को दंडवत प्रणाम कर वहाँ से चला जाता है। 

निष्कर्ष- दुनिया के 90 फीसदी से ज्यादा समस्याएँ क्रोध की वजह से उत्पन्न होती है। वक़्त रहते इन्हें सुलझा लेना चाहिए वरना जीवन के रास्ते और कठिनाइयां वक़्त के साथ लंबी होती जाती है।

Top 10 Moral Stories In Hindi – पाने की जिद

एक जमाना ऐसा था जब आम आदमी के लिए कार खरीदना या चलाना महज एक सपना हुआ करता था। उस जमाने में कारें इतनी महंगी हुआ करती थी की कोई आम आदमी उन्हें खरीद ही नहीं सकता था।

आज अगर कोई  गरीब से गरीब कार खरीद सकता है तो उसकी वजह है सर हेनरी फोर्ड जिन्होंने अपनी मेहनत और अपनी लगन से आम आदमी की पहुँच कारों तक पहुंचाई। सर हेनरी फोर्ड का जन्म 30 जुलाई को ग्रीनफील्ड टाउनशिप के मिशिगन, अमेरिका में हुआ था।

फोर्ड 6 भाई बहनों में  सबसे बड़े थे। फोर्ड के पिता एक मामूली किसान थे। वो चाहते थे की हेनरी उनकी तरह खेतों में काम करें परन्तु हेनरी की रुचि मशीन और मैकेनिकल में ज्यादा थी। हेनरी जीवन के शुरुवाती दिनों से ही घड़ियाँ बनाने का काम किया करते थे।

घड़ियाँ बनाने में वो एक्सपर्ट थे। वही से उनकी रुचि मशीनों में बढ़ती चली गई। वो मात्र 15 वर्ष के थे जब उनके पिता का देहांत हो गया।  पिता की मृत्यु के पश्चात हेनरी डेट्रॉइट चले गए जहाँ उन्होंने Johan F flowers and Brothers के साथ काम किया।

इसी वर्कशॉप से उन्होंने अपने एक्सपीरियंस की शुरुवात की। वो दिन में गाड़ी ठीक करते और रात में घड़ियाँ बनाते जिससे उन्हें एक्स्ट्रा इनकम हो सके। 7 साल तक वो विभिन्न कारखानों में काम करते रहे।

उनके पास इतना अनुभव हो गया था की वो किसी भी इंजन को ठीक कर पाए। हेनरी ने वेस्टिंगहाउस ज्वाइन कर लिया ये कंपनी उस वक़्त के कृषि में उपयोग होने वाले इंजन बनाती थी।

1988 में उन्होंने अपना कारखाना खोला और Clara jane Bryant से शादी कर ली। हेनरी के लिए वो दिन बहुत मुश्किल भरे  थे क्योंकि वो अपनी कमाई से खुद की और अपनी पत्नी की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे थे पर उन्होंने हार नहीं मानी।

यंत्रों और कलपुर्जो की कमी से हेनरी को अपना कारखाना बंद कर वापस डेट्रॉइट आना पड़ा। हेनरी की काबिलियत और काम के प्रति उनके जूनून को देखकर Adison  llimunating company ने उन्हें बतौर इंजीनियर काम पर रख लिया।

यहाँ पर ये बात ध्यान देने वाली है की हेनरी के पास कोई डिग्री नहीं थी उन्होंने जो कुछ सीखा अपनी काबिलीयत और अपने मेहनत के दम पर सीखा।

आगे चल कर 1893 में वो बतौर चीफ इंजीनियर प्रमोट हो गए। पैसो की तंगी अब दूर हो चुकी थी परन्तु हेनरी कुछ अलग ही करना चाह रखते थे। उनकी दिलचस्पी गैसोलीन के इंजन में ज्यादा थी इसलिए उन्होंने गैसोलीन के इंजन पर कार्य करना शुरू किया।

सन 1893 में उन्होंने वो कर दिखाया जो साधारण आदमी कभी करने की सोच भी नहीं सकता। उन्होंने पहला डीजल इंजन बना कर तैयार कर दिया, फिर 1896 में उन्होंने पहली कार बनाई जिसका नाम Quadricycle  रखा।

उनकी बनाई quadricycle ने पूरी दुनिया में धूम मचा दिया।  Quadricyle के बाद Adison Illuminating company ने उन्हें 1200 डॉलर का ऑफर दिया और कंपनी में बतौर General supritendent बनाने का प्रस्ताव रखा जिसे हेनरी ने मना कर दिया।

वो खुद की कंपनी बनाना चाह रहे थे।1899 में उन्होंने एक बिजनेसमैन  विलियम H Murphy की फंडिंग से “डेट्रॉइट” मोटर की आधार शिला रखी परन्तु 18 महीने बाद ही कंपनी दिवालिया घोषित हो गयी और हेनरी का सपना फिर एक बार टूट गया।

एक के बाद एक असफलता उन्हें मिलती रही पर वो रुके नहीं। आखिरकार वो दिन आ ही गया जो इतिहास में दर्ज हुआ ,दिन 16 जून 1903 ये वो दिन  था जब हेनरी फोर्ड ने ‘फोर्ड मोटर कार कंपनी’ की आधार शिला रखी। इस कंपनी में कुल 8 इन्वेस्टर थे और 28000 डॉलर का इन्वेस्टमेंट हुआ था।

हेनरी के हिस्से में लगभग 25.5% की हिस्सेदारी के शेयर आये। 15 जुलाई 1903 को फोर्ड मोटर ने पहली कार बेचीं जिसका नाम MoDel A था। उस साल कुल 1700 कारें फोर्ड मोटर ने बेची और उसके अगले साल 5000 कारें।   

हेनरी फोर्ड ‘फोर्ड मोटर’ के प्रेसिडेंट बन गए । उन्होंने सारे शेयर होल्डर से उनके शेयर खरीद लिए और कंपनी के मालिक बन गए। उनका असली मकसद किसी कंपनी का मालिक बनाना नहीं बल्कि वो यातायात के संसाधन को सस्ते से सस्ता बनाना चाहते थे।

1908 में हेनरी ने पहली ऐसी कर बनाई जिसे कोई आम आदमी भी खरीद सकता था। उसका कार का नाम उन्होंने Model T रखा। ये वो दौर था जब अमेरिका की सड़कों पर सिर्फ मॉडल टी दौड़ा करती थी।

उनकी सफलता का अंदाजा इसी से लगा लीजिये की उनकी कारों के लिए अमेरिका को अपनी सड़क ( रोड कंस्ट्रक्शन पालिसी) को बदलनी पड़ी। उस वक़्त अमेरिका में बहुत से हाईवे उनकी कारो के मुताबिक बने और आयल के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया गया।  

1924 में फोर्ड ने ट्रेक्टर भी बनाना शुरू कर दिया। फिर उन्होंने रेसिंग कर भी बनाई इस तरह 1931 तक फोर्ड 2 करोड़ कार बेच चुके थे। 1929 में फोर्ड ने ‘Edison Institute of Technology’ का निर्माण करवाया जहाँ भविष्य के युवा  इंजीनियरिंग के बेहतरीन अनुभवों को देख पाए और सीख पाए।  

फोर्ड का मकसद पैसा कमाना कभी नहीं रहा। वो अपने अनुभव और अपनी काबिलीयत से समाज के हर तबके तक कारों को पहुँचाना चाहते थे। यही वजह रही की वो निरंतर प्रयोग करते रहे और तब तक करते रहे जब तक उन्होंने वो कार नहीं बना ली जो आम आदमी तक पहुँच पाए।

शुरू की दो असफलता ने उन्हें तोडा नहीं बल्कि आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया अगर वो भी हार मान जाते तो आज भी कार आम आदमी का एक सपना भर होती।

हेनरी फोर्ड का एक किसान के बेटे से दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी का मालिक बनने तक का सफ़र हर किसी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।  

Top 10 Moral Stories In Hindi – करोड़ों की गलती

एक व्यक्ति बहुत महंगी कार खरीद कर लाया और बड़ी सावधानी से उसकी देखभाल करने लगा। व्यक्ति शादी शुदा था, उसकी एक पत्नी और एक 7 साल की बेटी थी।

बचपन से उसका सपना था की वो पैसे जोड़ जोड़ कर अपने लिए दुनिया की सबसे महंगी कार खरीदे। आज उसका सपना पूरा हो चूका था। वो बड़ा खुश  था की जो उसने चाहा उसे वो मिल गया।

रविवार का दिन था ,काम खत्म करके मियां बीवी बैठ कर आपस में बाते कर रहे थे। बेटी घर के बाहर बने गार्डन में खेल रही थी। बातों में दोनों इतने मशगूल हो गए की उन्हें ध्यान ही नहीं रहा की उनकी छोटी सी बेटी बाहर गार्डन में खेल रही है।

जब काफी वक्त गुजर गया तो उन्हें उसका ख्याल आया। माँ दौड़ते हुए गार्डेन में उसने देखने गयी, वहाँ जो उसने देखा उसे देखकर उसके होश उड़ गए। लड़की के हाथ में एक पत्थर था। उस पत्थर से वो कार के दरवाजे पर कुछ लिख रही थी।

कार के बाई तरफ का दरवाजा लिखने की वजह से भद्दा दिख रहा था ,उसका पेंट उतर चुका था। लड़की की माँ चिल्लाते हुए उसकी तरफ बढ़ी ताकी वो उसे और कुछ लिखने से रोक सके।

जैसे ही लड़की के पिता ने अपनी बीवी को चिल्लाते हुए सुना वो दौड़ता हुआ बाहर आया। उसने चार दिन पहले लाई हुई करोड़ों की कार पर जब निशान देखा तो उसका पारा चढ़ गया।

उसने अपनी 7 साल की बेटी को खूब मारा और डांटते हुए उसे वहाँ से भगा दिया। लड़की रोती हुई वहाँ से चली गई। उस व्यक्ति ने बहुत कोशिश की पर निशान को नहीं मिटा पाया। हार थककर वो  वही बैठ गया।

जब उसका गुस्सा शांत हुआ तब उसने सोचा की एक बार जाकर देखा जाए की आखिर उसकी बेटी लिख क्या रही थी? वो कार के पास गया और बड़े ध्यान से लिखे शब्दों को पढ़ने लगा।

शब्द थोड़े टेढ़े मेंढ़े थे परन्तु किसी तरह उसने मिला मिला कर उन शब्दों को पढ़ा। उन्हें पढ़ते ही वो वही बैठ गया और टकटकी लगाए उन्हीं शब्दों को देखता रहा ,वो करोड़ों की कार को भूल चुका था ,अपना हर सपना भूल चूका था उसे सिर्फ दिख रहे थे तो वो शब्द जो नन्ही से जान ने अपने पापा के लिए लिखा था।

कार पर अंग्रेजी में लिखा था “Dad I love you the most in the world”। अंग्रेजी में लिखे वो चंद शब्द उसकी करोड़ों की कार से कई गुना महंगे थे।

शायद जो उसने अब तक कमाया था उससे भी महंगे। वो भागता हुआ गया और अपनी बेटी को बाहों में भर कर रोने लगा, रोते रोते उसने अपनी बेटी से कहा “I m really sorry my princess  हो सके तो अपने पापा को माफ़ कर दो मैं भूल गया था की मेरी बेटी का प्यार उस कार की कीमत से कई गुना महंगा है”।   

निष्कर्ष- भौतिकवाद के इस जमाने में इंसान इंसान से कम और इंसान द्वारा बनाई चीजों से ज्यादा प्यार करने लगा है यही वजह है की आज के रिश्ते शाम को बनते है और सुबह टूट जाते है। कीमत कागज़ की कभी नहीं होती कीमत साँसों की होती है ,वरना कागज़ के नोट तो जेब में ही रह जाते है और साँसे साथ छोड़ जाती है। 

Top 10 Moral Stories In Hindi – परमार्थ का फल

एक बार एक बहुत अमीर कारोबारी होता है। उसकी बहुत सारी कंपनियाँ चल रही होती है। एक दिन जैसे ही ऑफिस का काम निपटा कर घर आता है देखता है की घर में पूजा पाठ का कार्यक्रम चल रहा है।

उसे भगवान और भक्ति में कोई दिलचस्पी नहीं होती वो हमेशा से कर्म को प्रधान मानता है इसलिए वो पूजा वाली जगह पर न रुककर अपने कमरे में चला जाता है। थोड़ी देर रुकने के पश्चात वो अपने नौकर को एक कप चाय के लिए बोलता है।

नौकर के जाने के बाद अचानक से उसके सीने में एक अजीब प्रकार का दर्द होने लगता है ,ऐसा लगता है जैसे उसका दम घुट रहा हो। वो नौकर को फौरन आवाज़ लगाता है और कहता है “चाय रहने दो जाओ मेरे लिए दर्द की दवाई और गर्म पानी लेकर आओ”।

नौकर ऐसा ही करता है। दवाई खाने के बाद भी कारोबारी को सुकून नहीं मिलता है। उसे लगता है जैसे दिन रात काम करके वो बाहर की शुद्ध हवा तो लेना जैसे भूल ही गया है शायद इसी वजह से उसका दम घुट रहा है।      

इसी सोच के साथ वो घर से बाहर अपने गार्डन में निकलता है परन्तु उसे वहाँ भी सुकून नहीं मिलता। सीने पर हाथ रखे और लंबी लंबी साँसे लेते हुए वो घर से बाहर सड़क पर आ जाता है। रात के 12 बज चुके होते है ,सड़क सुनसान हो चुकी होती है।

बेचैनी और घबराहट में वो कोशों दूर निकल जाता है। चलते चलते उसे एक पेड़ ने नीचे चबूतरा मिलता है। वो दोनों चप्पलें निकाल सुकून से वहाँ बैठ जाता है।

एकदम सुनसान और रात के अँधेरे में उसे अपने बचपन के दिन याद आते है की किस तरह उसने इतनी सारी तकलीफों को झेलते हुए इतना बड़ा कारोबार खड़ा किया अपने परिवार और खुद को गरीबी से बाहर निकाला।

उसे बचपन में हुई एक एक तकलीफ याद आती है। इतने में एक कुत्ता उसकी एक चप्पल दांतों में फसाए भागने लगता है । वो चप्पल को पाने के लिए कुत्ते के पीछे भागता है परन्तु कुत्ते को पकड़ नहीं पाता।

भागते भागते वो एक ऐसी बस्ती में आ जाता है जहाँ कई सारी झुग्गी -झोंपड़ी बनी होती है। असल में वो मजदूरों का इलाका होता है। किसी तरह वो कुत्ते से अपनी चप्पल छुड़ाता करता है।

चप्पल को पैरो में डाल जैसे ही वो घर जाने के लिए मुड़ता है उसे जोर जोर से किसी महिला के रोने की आवाज़ आती है। वो सोच में पड़ जाता है की क्या किया जाए? क्या चल कर देखा जाए की क्या बात है या घर निकला जाए? ,सुबह के 4 बज चुके थे आखिर वो इतनी रात को किसी महिला के घर जाएगा तो लोग क्या कहेंगे? वो घर की तरफ चल देता है , कुछ दूर चलने के बाद फिर उसके कदम रुक जाते है और वो सोचने लगता है की क्यों न एक बार चल कर देखा जाए की आखिर बात क्या है?         

वो रोती हुई आवाज़ का पीछा करते हुए उस घर तक पहुँचता है जहाँ से आवाज़ आ रही होती है। दरवाजा खटखटाते ही अन्दर से एक महिला निकल कर आती है। वो महिला के रोने का कारण पूछता है।

महिला बताती है की उसकी 8 साल की बेटी बहुत बीमार है ,उसका आपरेशन होना है परन्तु उसके पास इतने पैसे नहीं की वो उसका इलाज करा पाए।

कारोबारी उससे कहता है “आखिर रोने से क्या होगा ,रोने से आपकी बेटी ठीक नहीं होगी, फिर आप रो क्यों रही है, आप उन लोगों से पैसे क्यों नहीं मांगती जहाँ आप काम करती है शायद वो आपकी मदद कर दे ,परन्तु इस तरह रोने से कुछ नहीं होगा”।

महिला बताती है की वो जान बुझ कर रो रही थी, कल उसके यहाँ एक बाबा जी आये थे उन्होंने कहा था की सुबह के 4 बजते ही रोना शुरू कर देना एक भला मानुस तेरे रोने की आवाज़ सुनकर तेरे दरवाजे तक आएगा, वही तेरी मदद करेगा।

महिला की बात सुनकर कारोबारी को बड़ी हैरानी होती है की न वो भगवान के इतना करीब है और न वो उनकी पूजा करता है फिर भगवन ने उसे क्यों चुना किसी की मदद करने के लिए।     

वो तुरन्त एम्बुलेंस को कॉल करता है , डॉक्टर को बुलाता है और उनसे कहता है की इस लड़की का इलाज अच्छे से अच्छे अस्पताल में होना चाहिए जितना पैसा लगेगा वो देगा परन्तु लड़की ठीक होनी चाहिए। लड़की ला इलाज शुरू हो जाता है।

जब वो सब निपटा कर वहाँ से बाहर आता है तो उसे ख्याल आता है की उसकी बेचैनी तो रही ही नहीं, उसे तो एक अजीब प्रकार का सुकून महसूस हो रहा था। उसका बेचैन होना ,फिर घर से इतनी दूर आना ,कुत्ते का चप्पल लेकर भागना सब इत्तेफाक तो नहीं हो सकता।

वो समझ जाता है की भगवान स्वयं धरती पर नहीं आ सकते इसलिए उन्होंने उसे महिला की मदद करने का जरिया बना कर उसे वहाँ तक भेजा। एक कृतज्ञता की मुस्कराहट लिए वो घर की तरफ चल देता है।    

निष्कर्ष- पूरी उम्र हम पैसों के पीछे भागते है ताकि सुकून खरीद पाए ,परन्तु जब पैसा कमा लेते है तब सुकून नहीं मिलता, हमारी चाहत बढ़ती चली जाती है। किसी ने बहुत सच ही कहा है “मजा मंजिल पर पहुँच कर नहीं मिलता बल्कि मज़ा मंजिल तक पहुँचने में तय किए गए सफ़र से मिलता है, इसलिए लोगों की मदद करें, उनकी वेदना को पढ़े एहसान बनकर नहीं ईश्वर का जरिया बनकर।

Top 10 Moral Stories In Hindi – वक़्त बदलना चाहिए

 किसी समय की बात है एक गुरु और एक शिष्य ज्ञान की तलाश में एक गाँव से दूसरे गाँव भटक रहे थे। भटकते भटकते वो एक ऐसे गाँव में पहुंचे जहाँ गिनती के घर थे।

शिष्य ने भिक्षा की तलाश में गाँव के सभी लोगों का दरवाजा खटखटाया परन्तु किसी ने दरवाजा नहीं खोला। गाँव बहार से संपन्न और खुशहाल नज़र आ रहा था। गुरु को बड़ी हैरानी हुई की इतनी सम्पनता होते हुए कोई भिक्षा क्यों नहीं दे रहा।

काफी देर इंतज़ार करने के बाद जब कोई नहीं आया तो वो लोग गाँव के बाहर बने एक घर की तरफ चल दिए। गाँव के अन्य घर की तरह न ही ये घर पक्का था और न कोई रंग रोगन हुआ था।

घर के चारों तरफ उपजाऊ जमीन  थी परन्तु जमीन एकदम खाली पड़ी हुई थी, उसपर कोई फसल न थी। गुरु को ये बात बड़ी हैरान कर रही थी। गुरु अपने मन में चल रहे संशय को दूर करना चाह रहा था इसलिए उसने शिष्य को दरवाजा खटखटाने को कहा।

दरवाजा खटखटाते ही एक व्यक्ति बाहर आया और कहा “क्या किसी सहायता के लिए आये है ”? शिष्य ने कहा “क्या हमें कुछ खाने को मिल सकता है”? व्यक्ति घर के अन्दर गया और दोनों के लिए जलपान लेकर आया।  

गुरु ने अन्दर की अवस्था से पता लगा लिया की व्यक्ति किसी तरह अपना गुजारा करता है उसने जानना चाहा की आखिर ये अपना गुजर बसर कैसे करता है? गुरु ने उससे पूछा “आपने पूरी जमीं बंज़र छोड़ रखी है फिर आप घर कैसे चलाते है आपकी आय का क्या स्रोत है”? व्यक्ति ने बताया की उसके पास एक भैंस है जिसका दूध बेच कर वो घर चलता है।

गुरु ने व्यक्ति से एक रात के लिए आश्रय मांगी और वही रुक गया।  जब आधी रात हुई तो गुरु ने शिष्य को जगाया और उसके कानों में बुदबुदाने लगा। गुरु ने शिष्य से कहा “ जाओ और घर के पीछे बंधी भैंस खोल लाओ”।

शिष्य गुरु के इस बदले व्यवहार से अचंभित था की आखिर ये गुरु को क्या हो गया जो  आधी रात को भैंस चोरी करने के लिए कह रहे है  ,गुरु ने आज तक ऐसा नहीं किया था फिर आज क्यूँ? वो गुरु थे और वो शिष्य था इसलिए उसने ज्यादा सवाल जवाब नहीं किया और भैंस खोल लाया।

गुरु और शिष्य ने भैंस को ऐसी जगह छोड़ दिया जहाँ उससे ढूँढना या उसका लौट कर वापस आना मुश्किल था। काफी वक़्त गुजर गया शिष्य एक बहुत बड़ा गुरु बन चुका था उसके अपने गुरु का स्वर्गवास हो चुका था।

एक दिन उसने सोचा क्यों न चल कर देखा जाए की उस गरीब किसान की हालत कैसी है और थोड़ी उसकी मदद की जाए ? जब वो वहाँ पहुंचा तो सब कुछ बदल चुका था।

खाली पड़ी जमीन पर लम्बे लम्बे पेड़ थे ,किसान के घर की जगह एक हवेली थी। उसने सोचा लगता है किसान अपने भैंस खोने के गम  की वजह से सब बेच कर चला गया। जैसे ही वो वापस जाने के लिए मुड़ा एक व्यक्ति ने उसको आवाज़ दी।

ये वही गरीब किसान था जो हवेली से उसको देख रहा था। गुरु बने शिष्य ने पूछा की ये कैसे हुआ तुम इतने अमीर कैसे बने? किसान ने कहा “उस दिन जब आप लोग आये तो बिना बताये चले गए, दूसरी तरफ हमारी भैंस भी उसी रात कही चली गई, मैं बहुत निराश हो गया परन्तु मेरी भैंस नहीं मिली”।

फिर मैंने लकड़ी काटने का काम शुरू किया, धीरे धीरे अपने खेतों पर लकड़ी देने वाले पेड़ लगाए। मेरा मुनाफा दिन प्रति दिन बढ़ता गया। इस  तरह मैंने खुद का लकड़ी का कारोबार खड़ा कर लिया। आज मेरी शहर में कई शोरूम है जहाँ से मैं लाखों कमाता हूँ।

उस रात अगर वो भैंस गायब नहीं हुई होती तो मैं आज भी बस गुजर बसर कर रहा होता। अच्छा हुआ वो भैंस उस दिन कही चली गई। किसान की बात सुनते ही शिष्य को अपने गुरु की याद आई उसके आँखों में पानी आ गया।

गुरु द्वारा किए इतने बड़े परमार्थ को वो आज जान पाया था। उसने दोनों हाथ जोड़े और मन ही मन गुरु से क्षमा याचना की। 

निष्कर्ष- कभी कभी जिंदगी में हमारे साथ कोई अप्रिय घटना होती है उस पल तो हमें लगता है जैसे सब कुछ खत्म हो गया ,और हम तबाह हो गए परन्तु वही घटना हमारी जिंदगी बदल कर रख देती है, हमारी अवस्था उसी घटना की वजह से बदल जाती है और फिर हम कहते है अच्छा हुआ जो हमारे साथ ऐसा हुआ वरना हम आज भी वही होते। 

ये थे Top 10 Moral Stories In Hindi से कहानियाँ। आशा करता हूँ आपको पढ़ के अच्छा लगा होगा। आपको Top 10 Moral Stories In Hindi से ये कहानियाँ कैसी लगी हमे जरूर बताइए।

                                              

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